घाटशिला स्थित सोना देवी विश्वविद्यालय को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से मान्यता प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि के साथ विश्वविद्यालय ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। एआईसीटीई देश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों की निगरानी करने वाली प्रमुख राष्ट्रीय नियामक संस्था है, जो स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा कार्यक्रमों को मान्यता प्रदान करती है।
विश्वविद्यालय को विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए कुल 600 सीटों की स्वीकृति मिली है। अब यहां विद्यार्थी मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग तथा कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई कर सकेंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे आधुनिक विषयों में स्पेशलाइजेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के अंतर्गत भी विश्वविद्यालय में मेकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. ब्रजमोहन पट पिंगुवा ने बताया कि AICTE की मान्यता मिलने से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए नए अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही छात्र अब सरकारी छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण जैसी सुविधाओं के लिए भी पात्र हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह मान्यता केवल उन्हीं संस्थानों को दी जाती है, जहां तकनीकी शिक्षा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और उच्च गुणवत्ता के मानक मौजूद होते हैं।
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नित नयना ने खुशी जताते हुए कहा कि AICTE की मान्यता किसी भी तकनीकी शिक्षण संस्थान की विश्वसनीयता का प्रमाण होती है और यह विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी प्रदान करती है।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने इसे विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसका श्रेय इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की विभागाध्यक्ष पूजा तिवारी और उनकी टीम को दिया। टीम में अनल बेरा, मोहित, राहुल कुमार साव, आदिल, एस. के. आरिफ, दीपशिखा नस्कर और मोनिका सिंह शामिल हैं।
कुलाधिपति ने कहा कि टीम ने दिन-रात मेहनत कर इस प्रक्रिया को सफल बनाया है और सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं। विश्वविद्यालय को यह मान्यता मिलने के बाद संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों और फैकल्टी सदस्यों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।








