झारखंड में बीडीओ की कमी बढ़ाएगी मुश्किलें! मतदाता पुनरीक्षण और जनगणना ड्यूटी से विकास योजनाओं पर असर की आशंका

विभाग ने राज्य के सभी उप विकास आयुक्तों (डीडीसी) से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है कि कितने बीडीओ इन दोनों कार्यों में लगाए गए हैं।

Johar News Times
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रांची: झारखंड में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान और वर्ष 2027 की जनगणना के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) की तैनाती को लेकर ग्रामीण विकास विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने राज्य के सभी उप विकास आयुक्तों (डीडीसी) से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है कि कितने बीडीओ इन दोनों कार्यों में लगाए गए हैं। इससे पहले भी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन कई जिलों से रिपोर्ट नहीं मिलने पर विभाग ने दोबारा निर्देश जारी किया है।

राज्य के 24 जिलों के 260 प्रखंडों में से केवल 193 प्रखंडों में नियमित बीडीओ कार्यरत हैं, जबकि शेष प्रखंड अतिरिक्त प्रभार या रिक्त पदों के सहारे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में अधिकारियों की चुनावी और जनगणना कार्यों में तैनाती से ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

प्रखंड स्तर पर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), अबुआ आवास योजना, पंचायत विकास कार्य, स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियां, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन, विकास कार्यों की निगरानी और विभिन्न विभागों के समन्वय की जिम्मेदारी बीडीओ के पास होती है। अधिकारियों की कमी और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण योजनाओं की स्वीकृति, भुगतान, निरीक्षण और मॉनिटरिंग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग वास्तविक स्थिति का आकलन कर यह तय करना चाहता है कि कितने बीडीओ मतदाता पुनरीक्षण और जनगणना में व्यस्त हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था और प्रशासनिक रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर न पड़े।

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