सरायकेला: गैलेक्सी एक्सपोर्ट्स के गेट पर ग्रामीणों का जोरदार धरना; बॉयलर ब्लास्ट की जांच समेत 14 सूत्री मांगों पर अड़े, कंपनी का संचालन कराया बंद

सरायकेला में औद्योगिक संग्राम: गैलेक्सी एक्सपोर्ट्स का चक्का जाम, 75% स्थानीय रोजगार और मुआवजे की मांग तेज।

Johar News Times
4 Min Read

डिजिटल डेस्क चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के भूंईयाडीह टोला स्थित गैलेक्सी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य गेट पर सोमवार सुबह 8 बजे से सैकड़ों ग्रामवासियों और श्रमिकों ने तालाबंदी कर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और परिचालन को पूरी तरह ठप कर दिया। यह आंदोलन बीते 16 जून को कंपनी में हुए भीषण बॉयलर/भट्ठी विस्फोट के बाद मजदूरों की सुरक्षा और मुआवजे को लेकर शुरू हुआ है।

प्रदर्शन का नेतृत्व विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो, पूर्व जिला परिषद ओम लायक, कृष्णा कालिंदी, ग्रामप्रधान बहादुर लायक और आशुदेव महतो कर रहे थे। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर चांडिल पुलिस बल मुस्तैद थी।

लंबी वार्ता के बाद हटा धरना, मंगलवार शाम 4 बजे होगी त्रिपक्षीय बैठक

सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला यह धरना प्रदर्शन प्रबंधन के साथ लंबी बातचीत के बाद स्थगित हुआ। ग्रामीणों ने कंपनी के मैनेजर एस० के० वर्मा को प्रबंध निदेशक के नाम 14 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा।

आंदोलनकारियों ने प्रबंधन को साफ अल्टीमेटम दिया है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों ने धरना हटा लिया है और आगामी मंगलवार शाम 4:00 बजे कंपनी मालिक, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता तय हुई है, जिसमें अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बॉयलर ब्लास्ट की निष्पक्ष जांच और मुआवजे की मुख्य मांग

मजदूरों और ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग 16 जून 2026 को हुए बॉयलर ब्लास्ट की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की है। इसके अलावा आंदोलनकारियों ने मांग की है कि:

  • हादसे में घायल और कथित तौर पर मृत व्यक्तियों के आश्रितों को उचित मुआवजा, मुफ्त इलाज और पुनर्वास दिया जाए।
  • घायल श्रमिकों के पूरी तरह ठीक होने तक उनका नियमित वेतन जारी रखा जाए।
  • भारतीय बॉयलर अधिनियम और फैक्ट्री अधिनियम के तहत अधिकृत सरकारी एजेंसी से पूरे प्लांट की सुरक्षा जांच कराई जाए।

स्थानीय नियोजन नीति के तहत 75% नौकरियों और प्रदूषण पर नियंत्रण की मांग

ज्ञापन में झारखंड सरकार की स्थानीय नियोजन नीति का हवाला देते हुए मांग की गई है कि कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रेणियों में 75% स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए और इसकी सूची सार्वजनिक की जाए।

इसके साथ ही कंपनी से निकलने वाले धुएं, धूल और वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण लगाने तथा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से आसपास की बस्तियों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं देने की मांग उठाई गई है।

मजदूरों की 14 सूत्री मांगें एक नजर में:

  1. बॉयलर ब्लास्ट की निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट को सार्वजनिक करना।
  2. घायल व मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा, इलाज और पुनर्वास
  3. भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं पर इलाज, मुआवजा और वेतन की गारंटी।
  4. बॉयलर और संयंत्रों की सरकारी एजेंसी से नियमित जांच
  5. न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुसार नई दरों पर भुगतान।
  6. सभी पात्र कर्मचारियों को ESI, EPF और सामाजिक सुरक्षा का लाभ।
  7. हर मजदूर को सुरक्षा उपकरण और नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण।
  8. धुआं, धूल और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण, पर्यावरणीय मानकों का पालन।
  9. CSR फंड से बस्तियों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और बिजली की व्यवस्था।
  10. स्थानीय लोगों के लिए प्राथमिक चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता।
  11. स्थानीय नियोजन नीति के तहत 75% स्थानीय रोजगार और सूची का प्रकाशन।
  12. प्रभावित बस्तियों के लिए 24×7 एम्बुलेंस सुविधा
  13. हर महीने की 10 तारीख तक अनिवार्य वेतन भुगतान।
  14. बोनस अधिनियम 1965 के तहत पारदर्शी और समयबद्ध बोनस भुगतान।
Share This Article