रांची/राज्य डेस्क: प्रदेश में बिजली दरों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने आम जनता से लेकर व्यापारियों तक के पसीने छुड़ा दिए हैं। इस फैसले के खिलाफ अब जन-आक्रोश सड़कों पर नजर आने लगा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ उठाना उनके बस के बाहर की बात हो गई है।
हर वर्ग में भारी नाराजगी
बिजली शुल्क में बढ़ोतरी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- व्यापारी और उद्योग: बढ़ती लागत के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ रहा है।
- किसान: कृषि क्षेत्र में सिंचाई महंगी होने से किसानों की आर्थिक कमर टूट गई है।
- आम नागरिक: पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के नाम पर हो रही “मनमानी वसूली” से जनता में भारी रोष है।
भाजपा का कड़ा रुख: आंदोलन की दी चेतावनी
इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने विद्युत महाप्रबंधक (GM) कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनहित में फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा विपक्ष:
- दरों की वापसी: बढ़ी हुई बिजली दरों को तत्काल वापस लिया जाए।
- निर्बाध आपूर्ति: राज्य में 24 घंटे बिना रुकावट बिजली सुनिश्चित की जाए।
- बुनियादी सुधार: जले हुए ट्रांसफार्मरों को अविलंब बदला जाए और मरम्मत के नाम पर अघोषित कटौती बंद हो।
- स्मार्ट मीटर पर रोक: स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से की जा रही कथित अवैध वसूली पर रोक लगे।
“सरकार जनता की जेब पर डाका डाल रही है। यदि जल्द ही यह वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो भाजपा पूरे राज्य में व्यापक जनांदोलन शुरू करेगी।” — भाजपा प्रवक्ता
फिलहाल, बिजली को लेकर राज्य का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। अब देखना यह है कि बढ़ते दबाव के बीच सरकार क्या कदम उठाती है।
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