गुड़ाबांदा: गुड़ाबांदा प्रखंड क्षेत्र में गालूडीह से जीरो पॉइंट (ओडिशा सीमा) तक कैनाल किनारे सड़क निर्माण की वर्षों पुरानी मांग भले ही पूरी होती दिखाई दे रही हो, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जिस उम्मीद के साथ सड़क निर्माण शुरू हुआ था, वह फिलहाल धरातल पर नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण कार्य बेहद सुस्त रफ्तार से चल रहा है। उनका कहना है कि सड़क किनारे जेसीबी से केवल हल्की सफाई कर मिट्टी हटाई गई है और उसके ऊपर सीधे पत्थर का मेटल डाल दिया गया है। निर्माण प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन नहीं होने से ग्रामीणों को सड़क की गुणवत्ता पर संदेह है।
सूचना बोर्ड नहीं, निर्माण एजेंसी पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सड़क निर्माण का पूरा स्वरूप क्या होगा। निर्माण कार्य किस एजेंसी या ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है, इसकी भी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके अलावा परियोजना की लागत, समयसीमा और गुणवत्ता निगरानी से संबंधित विवरण भी लोगों को नहीं बताया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जबकि सरकारी परियोजनाओं में यह अनिवार्य माना जाता है। इससे लोगों के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पत्थर बिछाने से पैदल चलना भी हुआ मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार पहले खराब सड़क होने के बावजूद किसी तरह मोटरसाइकिल से आवागमन हो जाता था, लेकिन अब सड़क पर बड़े पैमाने पर पत्थर बिछा दिए जाने से पैदल चलना भी कठिन हो गया है। लोगों का कहना है कि निर्माण प्रक्रिया के तहत पत्थर बिछाने के बाद उस पर मिट्टी डालकर रोलर चलाया जाना चाहिए, ताकि सड़क मजबूत और समतल बन सके। लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं किया जा रहा है।
जल्द खराब होने की आशंका
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि निर्माण कार्य इसी तरह जारी रहा तो सड़क बनने के कुछ ही समय बाद खराब हो सकती है। उनका कहना है कि वर्षों के इंतजार के बाद क्षेत्र को यह महत्वपूर्ण सड़क मिल रही है, इसलिए निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
गुणवत्ता जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराने और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखते हुए निर्माण एजेंसी, लागत और कार्य योजना की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि जनता को भी परियोजना की प्रगति और गुणवत्ता की जानकारी मिल सके।
