गुमला : भारतमाला सड़क निर्माण परियोजना को लेकर गुमला जिले में विवाद गहराता जा रहा है। शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी पर किसानों की खेती योग्य जमीन पर जबरन सड़क निर्माण कराने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने उग्र विरोध जताया है। आंदोलन में महात्मा गांधी और जतरा टाना भगत के अनुयायी टाना भगत समाज के लोग भी शामिल हो गए हैं। टाना भगतों ने साफ कहा है कि वे अपने पूर्वजों की जमीन पर सड़क नहीं बनने देंगे। लगातार बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार को कोलपारा-घट्ठा गांव में ग्रामीणों, किसानों और आदिवासी नेताओं की एक अहम बैठक हुई। बैठक में महिलाओं के साथ कथित अभद्रता, फसलों को नुकसान पहुंचाने और बिना सहमति सड़क निर्माण शुरू करने को लेकर प्रशासन और शिवालया कंपनी के खिलाफ नाराजगी जताई गई। ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन और हाईकोर्ट में मामला ले जाने का निर्णय लिया।
बैठक की अगुवाई ग्राम प्रधान टिपरु मुंडा ने की। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों ने अपनी जमीन पर धान की बुआई कर खेतों की घेराबंदी की थी, लेकिन 11 मई को शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी के लाइजिंग मैनेजर दिगंबर सिंह कर्मचारियों और भारी मशीनों के साथ गांव पहुंचे और खेतों में जबरन निर्माण कार्य शुरू करा दिया। इस दौरान धान की फसल रौंद दी गई। विरोध करने पर महिला जमीन मालिकों और ग्रामीणों के साथ कथित अभद्र व्यवहार भी किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन किसानों की समस्याएं सुनने के बजाय कंपनी का पक्ष ले रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि बिना उचित मुआवजा और सहमति के जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। बैठक में मौजूद आदिवासी महिला नेता ज्योति एक्का ने कहा कि यह मामला आदिवासी जमीन, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा है। यदि ग्रामीणों की बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्राम प्रधान टिपरु मुंडा ने कहा कि जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए ग्रामीण अब कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और जल्द हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और जातिसूचक व्यवहार के मामले को मुख्यमंत्री और एसटी-एससी आयोग तक ले जाने की बात भी कही। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जब तक किसानों को उचित मुआवजा, फसल नुकसान की भरपाई और न्याय नहीं मिलता, तब तक गांव में निर्माण कार्य का विरोध जारी रहेगा।

गांव की काजल कुमारी ने आरोप लगाया कि ग्रामीण कई बार गुमला उपायुक्त से मिलने पहुंचे, लेकिन भारतमाला परियोजना की बात आते ही उपायुक्त मिलने से बचते रहे। वहीं गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए उपायुक्त के निर्देश पर प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया।
