झारखंड में नक्सलियों पर बड़ा दबाव: 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की घेराबंदी तेज, 15 कमांडर सरेंडर के मूड में, मोस्ट वांटेड बेला गिरफ्तार

झारखंड में नक्सलियों पर बड़ा दबाव: 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की घेराबंदी तेज, 15 कमांडर सरेंडर के मूड में, मोस्ट वांटेड बेला गिरफ्तार

Johar News Times
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झारखंड के सारंडा-कोल्हान जंगलों में सुरक्षा बलों की सख्ती के बीच माओवादी नेटवर्क पर बड़ा दबाव बन गया है। एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा की घेराबंदी तेज होती जा रही है। इसी बीच उनके दस्ते से जुड़े कई नक्सलियों के सरेंडर और गिरफ्तारी की खबरों ने संगठन की कमर तोड़ दी है।

बेला की गिरफ्तारी से माओवादी नेटवर्क को झटका

माओवादी संगठन की मोस्ट वांटेड महिला नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। उसे उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के एक गुप्त ठिकाने से पकड़ा गया। बेला झारखंड और पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों की प्रमुख समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) बताई जाती है। उसके खिलाफ झारखंड में 23 आपराधिक मामले दर्ज हैं और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह नदिया जिले के चकदह की रहने वाली है।

मिसिर बेसरा के 15 कमांडर सरेंडर के मूड में

सूत्रों के अनुसार सारंडा के मंकी फॉरेस्ट में घिरे मिसिर बेसरा के दस्ते के लगभग 53 नक्सलियों में से 15 ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का मन बना लिया है। सुरक्षा बलों की लगातार घेराबंदी, सर्च ऑपरेशन और दबाव के चलते यह बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इनमें कई कुख्यात इनामी कमांडर भी शामिल हैं।

कई बड़े नाम पुलिस संपर्क में

दस्ते के भीतर टूट की स्थिति स्पष्ट होती जा रही है। जिन नक्सलियों के सरेंडर या संपर्क में आने की बात सामने आई है, उनमें शामिल हैं—

  • 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर अश्विन
  • 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर चंदन लोहरा
  • 5 लाख के इनामी सब-जोनल कमांडर सोहन पुनेई उर्फ रंगा
  • सब-जोनल कमांडर माधई पात्रा
  • एरिया कमांडर रजनी मुदगम
  • एरिया कमांडर सलोनी मुंडा उर्फ पारूल
  • दस्ता सदस्य अनीशा, जेलानी और सपना सहित अन्य सदस्य

इनमें कई नक्सली अब पुलिस शरण में बताए जा रहे हैं।

माधई पात्रा ने किया सरेंडर

इसी बीच सब-जोनल कमांडर माधई पात्रा ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार था और कथित तौर पर उसने मिसिर बेसरा से अनुमति लेकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

सारंडा में घेराबंदी से बढ़ी मुश्किलें

सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के चलते मिसिर बेसरा की स्थिति बेहद कठिन बताई जा रही है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की रणनीतिक घेराबंदी के कारण माओवादी संगठन का प्रभाव लगातार कमजोर पड़ता दिख रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सरेंडर और गिरफ्तारियों की इस श्रृंखला से संगठन के भीतर भ्रम और भय का माहौल बढ़ा है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े घटनाक्रम की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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