चाईबासा: 72 घंटे बाद गुवा सेल खदान का चक्का जाम समाप्त, 50 स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

चाईबासा: 72 घंटे बाद गुवा सेल खदान का चक्का जाम समाप्त, 50 स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

Johar News Times
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चाईबासा में पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा स्थित स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की लौह अयस्क खदान में चल रहा अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन 72 घंटे बाद समाप्त हो गया। 11 मई से शुरू हुआ यह आंदोलन 13 मई की देर रात लगभग 11 बजे त्रिपक्षीय वार्ता के बाद समाप्त करने की घोषणा के साथ खत्म हुआ।

तीन दिनों तक ठप रहा खदान का संचालन

सारंडा क्षेत्र के खदान प्रभावित गांवों के मुंडा-मानकी संघ के नेतृत्व में और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के समर्थन से चल रहे इस आंदोलन के कारण गुवा खदान की उत्पादन और परिवहन व्यवस्था लगभग 72 घंटे तक पूरी तरह ठप रही। लौह अयस्क की ढुलाई रुकने से खदान प्रबंधन पर स्थानीय मांगों को लेकर दबाव बढ़ गया। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग 500 स्थानीय युवाओं को रोजगार, विस्थापित परिवारों को प्राथमिकता और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान था। आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा शामिल रहे।

त्रिपक्षीय वार्ता में बनी सहमति

बुधवार शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक चली लंबी त्रिपक्षीय वार्ता में अंततः सहमति बनी, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया। वार्ता में तय हुआ कि खदान प्रभावित 18 गांवों समेत कुल 19 गांवों के बेरोजगार युवाओं के लिए नई रोजगार नीति बनाई जाएगी और एक विशेष समिति गठित होगी। इस समिति का नोडल अधिकारी गुवा थाना प्रभारी को बनाया गया है।

50 स्थानीय युवाओं को तत्काल रोजगार

समझौते के अनुसार रांजाबुरू खदान में कार्यरत ठेका कंपनी “मां सरला” तत्काल 50 स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देगी। भविष्य में खदान में जितनी भी मैनपावर की जरूरत होगी, उसमें प्राथमिकता इन्हीं 19 गांवों के युवाओं को दी जाएगी। ग्रामसभा के माध्यम से सभी गांवों के मानकी और मुंडा शिक्षित एवं योग्य युवाओं की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर उनके दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर अंतिम चयन किया जाएगा। समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी 19 गांवों को समान प्राथमिकता दी जाएगी और बाहरी लोगों को रोजगार नहीं दिया जाएगा।

वार्ता में मौजूद रहे प्रमुख प्रतिनिधि

वार्ता में स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड प्रबंधन की ओर से सीजीएम माइंस चंद्रभूषण कुमार, सीजीएम एचआर धीरेंद्र मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से जगन्नाथपुर एसडीओ, किरीबुरू एसडीपीओ, नोवामुंडी अंचलाधिकारी और बीडीओ सहित कई अधिकारी शामिल हुए। वहीं आंदोलनकारियों की ओर से मधु कोड़ा, मानकी सुरेश चांपिया, मंगता सुरीन और जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी सहित कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

स्थिति सामान्य, परिवहन बहाल

समझौते के बाद बुधवार देर रात से खदान क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने लगी और लौह अयस्क परिवहन को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई। आंदोलनकारियों ने इसे स्थानीय युवाओं की बड़ी जीत बताया, हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो आगे फिर आंदोलन किया जाएगा।

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