बजट 2025-26 का आखिरी दिन: झारखंड में 1.45 लाख करोड़ खर्च करने की ‘महा-जंग’, लैप्स होने का डर

Johar News Times

रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के लिए आज का दिन किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 का आज अंतिम दिन (31 मार्च) है और रात 12 बजे की समय सीमा से पहले 1.45 लाख करोड़ रुपये के विशालकाय बजट को ठिकाने लगाने या फाइलों में समेटने के लिए सरकारी महकमों में अफरा-तफरी का माहौल है।

सांसें थमी, फाइलें दौड़ रही: रात 12 बजे तक का है वक्त

राजधानी रांची समेत राज्य के सभी कोषागारों (Treasuries) में फाइलों और बिलों का सैलाब उमड़ पड़ा है। नियम बेहद कड़े हैं—यदि आज रात 12 बजे तक आवंटित राशि का उपयोग नहीं हुआ या उसे सरेंडर नहीं किया गया, तो यह भारी-भरकम पैसा हमेशा के लिए ‘लैप्स’ (शून्य) हो जाएगा। सरकारी दफ्तरों में अधिकारी और कर्मचारी चाय की चुस्कियों के साथ कंप्यूटर स्क्रीन पर उंगलियां दौड़ा रहे हैं ताकि ठेकेदारों के भुगतान और विकास योजनाओं के बिलों को समय रहते हरी झंडी मिल सके।

- Advertisement -
Ad image

मइयां सम्मान योजना ने रचा इतिहास, कई विभाग रहे ‘फिसड्डी’

इस वित्तीय वर्ष के रिपोर्ट कार्ड पर नजर डालें तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने सबको पीछे छोड़ दिया है।

  • शानदार प्रदर्शन: विभाग ने अपने ₹22,138.90 करोड़ के बजट में से लगभग ₹19,913.77 करोड़ सीधे महिलाओं के खातों में पहुंचाकर रिकॉर्ड बनाया है।
  • सुस्त रफ्तार: दूसरी तरफ परिवहन, खनन और श्रम विभाग जैसे महकमे खर्च के मामले में बेहद सुस्त साबित हुए हैं।

प्रमुख विभागों का प्रदर्शन एक नजर में:

विभागस्थितिमुख्य कारण
महिला एवं बाल विकासटॉपरमइयां सम्मान योजना का सफल क्रियान्वयन
स्वास्थ्य एवं पेयजलसंकट मेंजमीनी स्तर पर काम लटके होने से पैसा लैप्स होने का डर
परिवहन एवं खननफिसड्डीप्रशासनिक सुस्ती और धीमी प्रक्रिया

1.58 लाख करोड़ के नए बजट की नींव आज की क्लोजिंग पर

हेमंत सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहले ही ₹1.58 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट घोषित कर रखा है। जानकारों का कहना है कि झारखंड जैसे राज्य के लिए कुल बजट का 85-90% खर्च कर पाना एक बड़ा कीर्तिमान होता है। सरकार ने इस बार पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में 18% की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था, लेकिन स्वास्थ्य और जल संसाधन जैसे बड़े विभागों की सुस्ती ने करोड़ों रुपये लैप्स होने की कगार पर ला खड़े किए हैं।

निष्कर्ष: आज रात निकलने वाली फाइनल क्लोजिंग रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि झारखंड सरकार का ‘समावेशी विकास’ का नारा जमीन पर कितना सफल रहा और अगले साल की नई योजनाओं के लिए जमीन कितनी मजबूत है।

TAGGED:
Share This Article