साहित्य अकादमी के मंच पर गूंजी झारखंड की व्यथा; जवाहरलाल बांकिरा ने पलायन और वन विनाश पर पढ़ी कविताएं

Johar News Times
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चाईबासा, संवाददाता नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘साहित्य उत्सव’ में चाईबासा के वरिष्ठ साहित्यकार और वेस्ट सिंहभूम ‘हो’ राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जवाहरलाल बांकिरा ने झारखंड का गौरव बढ़ाया। उन्होंने राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के ‘देशज स्वर’ सत्र में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए आदिवासी समाज की ज्वलंत समस्याओं को अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय पटल पर रखा।

विस्थापन और पर्यावरण पर केंद्रित रहा काव्य पाठ

बांकिरा ने अपनी कविताओं में विशेष रूप से झारखंडी युवाओं के पलायन और तेजी से कटते वनों के दर्द को स्वर दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत दो प्रमुख कविताओं ने श्रोताओं का ध्यान खींचा:

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  • ‘डाडु सेनो:यना नला बासा’ (डाडू चला कमाने परदेश): यह कविता उन जनजातीय युवाओं की विवशता को दर्शाती है, जिन्हें आजीविका के लिए अपने गांव-घर छोड़कर दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करने जाना पड़ता है।
  • ‘सारंडा बुरु अमिङोः तना’ (सारंडा जंगल नष्ट हो रहा है): इस कविता के माध्यम से उन्होंने एशिया के सबसे घने सारंडा वन के अस्तित्व पर मंडराते खतरों और पर्यावरण क्षरण के प्रति चेतावनी दी।

साहित्य जगत में खुशी की लहर

राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित मंच पर बांकिरा को आमंत्रित किए जाने और उनके सफल काव्य पाठ पर ‘हो’ राइटर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने हर्ष व्यक्त किया है। बधाई देने वालों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कृष्णा देवगम (सचिव, हो राइटर्स एसोसिएशन)
  • दिलदार पूर्ति (संयुक्त सचिव)
  • सिकंदर बुड़ीउली (संगठन सचिव)
  • शायरा सारिका पूर्ति सुंडी, साहित्यकार तिलक बारी, सोनू हेस्सा, जगन्नाथ हेस्सा और सोनी कुमारी।

“जवाहरलाल बांकिरा का राष्ट्रीय मंच पर अपनी भाषा और संस्कृति के साथ-साथ यहाँ की समस्याओं को उठाना पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है।” — हो राइटर्स एसोसिएशन

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