MGNREGA हड़ताल पर झारखंड सरकार का कड़ा रुख: काम पर लौटें वरना होगी कार्रवाई, ‘No Work-No Pay’ लागू

मनरेगा हड़ताल पर झारखंड सरकार सख्त, काम पर नहीं लौटे तो जाएगी नौकरी!

Johar News Times
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झारखंड में मनरेगा योजनाओं के ठप पड़े कामकाज को देखते हुए राज्य सरकार अब पूरी तरह सख्त हो गई है। मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे मनरेगा क्षेत्रीय कर्मियों को सरकार ने काम पर लौटने का अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है।

महात्मा गांधी नरेगा योजना के आयुक्त मृत्युंजय कुमार बर्णवाल ने राज्य के सभी उपायुक्तों और उप विकास आयुक्तों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि हड़ताली कर्मियों को तुरंत ड्यूटी पर वापस बुलाया जाए। निर्धारित समय में काम पर न लौटने वाले कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

3 महीने से हड़ताल, लक्ष्यों पर लगा ग्रहण

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मनरेगा कर्मी मार्च 2026 से ही हड़ताल पर हैं। इसके कारण ग्रामीण इलाकों में रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम पूरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • नए श्रमिकों का निबंधन
  • मानव दिवस सृजन
  • कार्य आवंटन
  • मस्टर रोल प्रबंधन

ग्रामीण विकास विभाग ने पहले ही इस हड़ताल को देखते हुए ‘नो वर्क-नो पे’ का सिद्धांत लागू कर दिया है, यानी जितने दिन कर्मी हड़ताल पर रहेंगे, उतने दिन का वेतन काटा जाएगा। इसके बावजूद कर्मी काम पर वापस नहीं लौटे हैं।

मानव दिवस सृजन में आई भारी गिरावट

हड़ताल के कारण झारखंड में ग्रामीण रोजगार की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, लक्ष्य के मुकाबले मानव दिवस सृजन का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है:

महीना (2026)लक्ष्य के मुकाबले हासिल हुआ काम (%)
मार्चकेवल 28.91%
अप्रैलमहज 7.71%
मईकेवल 26.78%

विभाग की चिंता: अगर यही स्थिति आगे भी बनी रही, तो वित्तीय वर्ष के वार्षिक लक्ष्य को हासिल करना सरकार के लिए नामुमकिन हो जाएगा।

वैकल्पिक व्यवस्था से खींचा जा रहा है काम

योजनाओं को पूरी तरह बंद होने से बचाने के लिए सरकार ने बैकअप प्लान तैयार किया है। फिलहाल निम्नलिखित कर्मियों के भरोसे वैकल्पिक व्यवस्था चलाई जा रही है:

  • पंचायत सचिव और जनसेवक
  • प्रखंड एवं जिला स्तर के अधिकारी
  • उपलब्ध रोजगार सेवक और अन्य संविदा कर्मी

हालांकि, क्षेत्रीय कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण जमीनी स्तर पर कार्यों की गति बेहद धीमी है।

जिलों को अंतिम निर्देश: होगी संविदा रद्द

मनरेगा आयुक्त ने जिला प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे अपने-अपने स्तर पर हड़ताली कर्मियों को तत्काल काम पर लौटने का नोटिस जारी करें। इसके बाद भी जो कर्मी काम पर नहीं आते हैं, उनके खिलाफ संविदा रद्द करने और अन्य कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

सरकार का साफ संदेश: मनरेगा ग्रामीण आबादी के लिए रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है। सरकार इसकी निरंतरता से कोई समझौता नहीं करेगी और अब प्रशासन पूरी क्षमता के साथ योजनाओं को बहाल करने के लिए हर सख्त कदम उठाने को तैयार है।

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