चाईबासा/जमशेदपुर: झारखंड की रत्नगर्भा धरती एक बार फिर अपनी बेशकीमती संपदा उगलने को तैयार है। पश्चिमी सिंहभूम जिले में सोने के विशाल भंडार की तलाश अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। जिले के लगभग 1900 हेक्टेयर के विस्तृत भू-भाग में ड्रिलिंग और वैज्ञानिक अन्वेषण (Exploration) का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।

GSI की रिपोर्ट ने जगाई उम्मीद
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India – GSI) द्वारा पूर्व में किए गए सर्वे और सैंपलिंग में इस क्षेत्र में सोने की मौजूदगी के पुख्ता संकेत मिले थे। उसी वैज्ञानिक रिपोर्ट को आधार बनाकर अब विस्तृत ड्रिलिंग शुरू की गई है। वैज्ञानिकों की टीम जमीन की गहराइयों से सैंपल निकालकर यह पता लगाने में जुटी है कि सोना कितनी मात्रा में और कितनी गहराई पर उपलब्ध है।
सिंहभूम: पहले भी मिल चुके हैं संकेत
सिंहभूम का बेल्ट खनिज संपदा के मामले में विश्वभर में प्रसिद्ध है। इससे पहले भी इस क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में सोने के अंश पाए गए हैं। वर्तमान में चल रही ड्रिलिंग का उद्देश्य भंडार की वास्तविक क्षमता (Estimated Reserve) का सटीक आकलन करना है।
अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख
भू-वैज्ञानिकों और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहाँ व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable) सोने का भंडार मिलता है, तो:

- राजस्व में वृद्धि: झारखंड सरकार के खजाने में रॉयल्टी के माध्यम से भारी बढ़ोतरी होगी।
- रोजगार के अवसर: खनन गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
- औद्योगिक विकास: नए खनन हब बनने से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली, पानी) का तेजी से विकास होगा।
आगे क्या?
फिलहाल विशेषज्ञों की टीम लैब टेस्टिंग और डेटा विश्लेषण में जुटी है। ड्रिलिंग से प्राप्त सैंपल्स की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यहाँ खनन शुरू करना कितना फायदेमंद होगा। झारखंडवासियों की नजरें अब जीएसआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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