जमशेदपुर/डेस्क: ( प्रभंजन कुमार ) आधुनिक भारत के निर्माता और भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का व्यक्तित्व और कृतित्व केवल एक कालखंड तक सीमित नहीं है। वे एक ऐसी विचारधारा हैं, जिसने सदियों से उपेक्षित और वंचित समाज को स्वाभिमान से जीने का अधिकार दिया। आज उनकी जयंती पर पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है।

संविधान के माध्यम से लोकतंत्र की मजबूत नींव
स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री और संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में बाबा साहेब ने दुनिया का सबसे बड़ा और समावेशी संविधान तैयार किया।
- समान अधिकार: उन्होंने सुनिश्चित किया कि भारत के हर नागरिक को—चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या लिंग का हो—समान अधिकार और स्वतंत्रता मिले।
- भेदभाव का अंत: संविधान में छुआछूत जैसी कुरीतियों के उन्मूलन और मौलिक अधिकारों को स्थान देकर उन्होंने एक न्यायपूर्ण समाज की नींव रखी।
सामाजिक न्याय के सबसे बड़े योद्धा
डॉ. आंबेडकर का मानना था कि “समानता के बिना स्वतंत्रता अधूरी है।” उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष में झोंक दिया।
- उन्होंने दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संवैधानिक संरक्षण (आरक्षण) की व्यवस्था की।
- उनका संघर्ष केवल एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के सम्मान के लिए था।
‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’
बाबा साहेब ने समाज को जो सबसे बड़ा मंत्र दिया, वह था शिक्षा का। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे गुलामी की जंजीरें काटी जा सकती हैं। उन्होंने वंचित समाज से आह्वान किया कि वे शिक्षा के जरिए सशक्त बनें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।
आधुनिक भारत के मार्गदर्शक
आज जब हम एक विकसित भारत का सपना देखते हैं, तो बाबा साहेब के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। चाहे वह आर्थिक सुधार हों, महिलाओं का अधिकार (हिंदू कोड बिल) हो या श्रमिकों के हित—डॉ. आंबेडकर के दूरदर्शी विचारों ने हर क्षेत्र में भारत को दिशा दी है।
निष्कर्ष
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें न केवल एक पवित्र ग्रंथ ‘संविधान’ दिया, बल्कि हमें लोकतंत्र में विश्वास और न्याय की उम्मीद भी दी। उनके दिखाए समतामूलक समाज के रास्ते पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जोहार न्यूज़ टाइम्स की ओर से भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।










