जमशेदपुर (सोनारी): लौहनगरी के हुनर का डंका एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बजा है। सोनारी निवासी मैकेनिकल इंजीनियर सौम्य दीप ने जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित ‘एनर्जी टेक कॉन्फ्रेंस 2026’ में अपनी क्रांतिकारी ऊर्जा अवधारणा (Energy Concept) प्रस्तुत कर शहर और देश का मान बढ़ाया है।
क्या है ‘साइक्लिक ग्रेविटो-क्रायोजेनिक’ मॉडल?
सौम्य दीप ने एक ऐसी काल्पनिक हाइब्रिड ऊर्जा प्रणाली का प्रस्ताव रखा है जो भविष्य में बिजली उत्पादन और भंडारण की परिभाषा बदल सकती है। उनके शोध का विषय “लिक्विड एयर को वर्किंग मीडियम के तौर पर इस्तेमाल करने वाला एक साइक्लिक ग्रेविटो-क्रायोजेनिक-जियोथर्मल एनर्जी कन्वर्जन सिस्टम” था।
इस तकनीक की कार्यप्रणाली तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी है:
- गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा (Gravity): तरल वायु से भरे कंटेनर को गहरे शाफ्ट में नीचे भेजकर ऊर्जा उत्पन्न करना।
- भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal): जमीन की गहराई में मौजूद प्राकृतिक गर्मी का उपयोग।
- क्रायोजेनिक तकनीक: नीचे पहुँचने पर पृथ्वी की ऊष्मा से तरल वायु को गैस में बदलना, जिससे टर्बाइन घूमती है और अतिरिक्त बिजली पैदा होती है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा
सौम्य दीप के इस नवाचार को वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों ने न केवल सुना बल्कि इसकी व्यवहार्यता की सराहना भी की।
- सम्मान: इस शोध पत्र के लिए उन्हें ‘सर्टिफिकेट ऑफ रिमार्केबल प्रेजेंटेशन’ से नवाजा गया।
- दिग्गज पैनल: सत्र की अध्यक्षता ब्रिटेन के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. पीटर हररोप और ऑकलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एल. वेन ने की।
भविष्य की हरित ऊर्जा की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक धरातल पर उतरती है, तो यह स्वच्छ (Green) ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति ला सकती है। सौर और पवन ऊर्जा की सीमाओं को लांघकर यह प्रणाली सतत और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम हो सकती है।
जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर से निकलकर वैश्विक पटल पर ऐसी वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन करना निश्चित रूप से झारखंड के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
ब्यूरो रिपोर्ट, जमशेदपुर।










