Jamshedpur News: IAS अमिताभ कौशल की एक दूरदर्शी सोच ने बचाई सैकड़ों जिंदगियां, मानगो पुल की लोहे की जाली बनी ‘जीवन रक्षक’

"अफसर हो तो ऐसा! IAS अमिताभ कौशल के 11 साल पुराने फैसले से जमशेदपुर में आज भी बच रही हैं जानें।"

Johar News Times
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प्रशासनिक अधिकारियों के कुछ फैसले वक्त के दायरे से परे जाकर समाज के लिए वरदान साबित होते हैं। झारखंड के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी डॉ. अमिताभ कौशल की ऐसी ही एक दूरदर्शी पहल आज भी जमशेदपुर में ‘लाइफ सेवर’ की भूमिका निभा रही है। साल 2015 में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त रहते हुए उन्होंने मानगो स्थित स्वर्णरेखा नदी पुल पर जो सुरक्षा जाली लगवाई थी, वह आज एक दशक बाद भी लोगों की जान बचा रही है।

दिल्ली के यमुना ब्रिज को देखकर आया था आइडिया

इस लाइफ-सेविंग प्रोजेक्ट के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। दिसंबर 2015 में डॉ. अमिताभ कौशल दिल्ली की यात्रा पर थे। वहां यमुना नदी के पुल पर लगी ऊंची जालियों को देखकर उन्हें फौरन जमशेदपुर के मानगो पुल की याद आई, जहां से नदी में कूदकर आत्महत्या करने की घटनाएं आम हो चुकी थीं।

जमशेदपुर लौटते ही उन्होंने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने जेएनएसी और टाटा स्टील यूआईएसएल के आला अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की। इसके बाद महज 22 लाख रुपये की लागत से पुल के दोनों ओर मजबूत सुरक्षा जाली लगाने के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई।

कैसे जान बचाती है यह जाली?

इस सुरक्षा जाली की बनावट और ऊंचाई ऐसी है कि पुल से कूदने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को पहले जाली पर चढ़ना पड़ता है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण वहां से गुजरने वाले राहगीरों, स्थानीय लोगों और मुस्तैद पुलिस को भनक लग जाती है और वे डिप्रेशन या तनाव में आए व्यक्ति को खींचकर सुरक्षित बचा लेते हैं। पिछले 10 सालों में इस जाली की वजह से सैकड़ों लोगों को नया जीवन मिला है।

रविवार शाम फिर टला बड़ा हादसा

इस जीवन रक्षक जाली की उपयोगिता रविवार शाम एक बार फिर देखने को मिली। बर्मामाइंस की रहने वाली तमन्ना परवीन (परिवर्तित नाम) गंभीर निजी परेशानियों और मानसिक तनाव के कारण मानगो पुल से कूदकर अपनी जान देने पहुंची थीं।

पुल पर लगी जाली के कारण वह तुरंत नीचे नहीं कूद सकीं। इसी बीच मौके पर मौजूद सजग स्थानीय लोगों और पत्रकारों की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने तत्परता दिखाते हुए युवती को पकड़ लिया। सूचना मिलते ही मानगो थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवती की उचित काउंसलिंग करने के बाद उसे सुरक्षित उसके परिजनों को सौंप दिया।

स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों का साफ कहना है कि अगर तत्कालीन उपायुक्त डॉ. अमिताभ कौशल ने यह जाली नहीं लगवाई होती, तो आज कई परिवारों के चिराग बुझ चुके होते। प्रशासनिक सूझबूझ का यह बेहतरीन उदाहरण आज भी पूरे राज्य के लिए एक मिसाल है।

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