जमशेदपुर: सुदूर पहाड़ी गांव की बेटियों के सपनों को मिले पंख, सारदामणि हाई स्कूल में हुआ नामांकन

सपनों को मिली उड़ान: डुमरिया के पहाड़ों से निकलकर जमशेदपुर के बड़े स्कूल पहुँचीं जनजातीय बेटियाँ।

Johar News Times
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शिक्षा की लौ अब पहाड़ों से निकलकर शहर के बड़े स्कूलों तक पहुँच रही है। डुमरिया प्रखंड के अत्यंत सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्र लाखाईडीह की तीन जनजातीय छात्राओं के लिए बेहतर भविष्य के द्वार खुल गए हैं। इन छात्राओं का नामांकन जमशेदपुर के प्रतिष्ठित सारदामणि गर्ल्स हाई स्कूल में नौवीं कक्षा में कराया गया है।

पहाड़ी गांव से शहर तक का सफर

नामांकित छात्राओं में दिगी टुडू, गंगा मारंडी और सिनगो टुडू शामिल हैं। ये तीनों छात्राएं डुमरिया के दुर्गम गांव लाखाईडीह की रहने वाली हैं, जहाँ से निकलकर शहर में पढ़ाई करना किसी बड़े सपने से कम नहीं था। अब ये छात्राएं शहर के आधुनिक शैक्षणिक माहौल में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

जल शक्ति मिशन के दौरे ने बदली किस्मत

इस पहल की शुरुआत भारत सरकार के जल शक्ति मिशन के अपर सचिव के.के. सोन के लाखाईडीह दौरे के समय हुई थी। ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए तत्कालीन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी को आवेदन सौंपा था। प्रशासन ने इस पर संजीदगी दिखाई और बेटियों के भविष्य के लिए विशेष योजना बनाई।

प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के तबादले के बावजूद इस मिशन को रुकने नहीं दिया गया। उनके निजी सचिव ललन कुमार और डीडीसी नागेंद्र पासवान ने इस मुहिम को आगे बढ़ाया।

  • छात्राओं के रहने के लिए साकची स्थित कार्यकारी महिला छात्रावास में व्यवस्था की गई है।
  • प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 1700 रुपये मासिक शुल्क वाले कमरे को इन छात्राओं के लिए मात्र 500 रुपये में उपलब्ध कराया है।

“सुदूर पहाड़ी क्षेत्र की इन बच्चियों का शहर में पढ़ना पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। इससे अन्य छात्राओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। हम प्रशासन के इस सहयोग के लिए आभारी हैं।”

कान्हु राम टुडू, ग्राम प्रधान

प्रशासन की इस मानवीय और शिक्षाप्रद पहल की हर तरफ सराहना हो रही है। यह कदम न केवल जनजातीय समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाएगा, बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को भी धरातल पर चरितार्थ करेगा।


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