झारखंड में 80 प्रतिशत शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी से शिक्षा व्यवस्था पर संकट, बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने की आशंका

झारखंड में 80 प्रतिशत शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी से शिक्षा व्यवस्था पर संकट, बोर्ड परीक्षा की तैयारी प्रभावित होने की आशंका

Johar News Times
4 Min Read

रांची, झारखंड में शुरू हो रहे भारत जनगणना 2027 के पहले चरण ने राज्य की स्कूल शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। सरकारी स्कूलों के लगभग 80 प्रतिशत शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाए जाने से कक्षाओं में नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।

सबसे अधिक चिंता 8वीं, 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षार्थियों को लेकर है, जिनके पाठ्यक्रम समय पर पूरा होने पर सवाल खड़े हो गए हैं। जनगणना का यह चरण 1 मई से शुरू होकर अगले वर्ष फरवरी तक विभिन्न चरणों में चलेगा। इसमें मकान सूचीकरण, परिवार विवरण, जनसंख्या आंकड़े, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा स्तर और अन्य आधारभूत सूचनाओं का सर्वे शामिल है।

- Advertisement -
Ad image

फील्ड वर्क और डाटा एंट्री में लगे शिक्षक

जानकारी के अनुसार शिक्षकों को फील्ड वर्क, डाटा एंट्री और सत्यापन जैसे कार्यों में लगाया गया है, जिससे स्कूलों में नियमित पढ़ाई बाधित होना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि जनगणना को राष्ट्रीय महत्व का कार्य माना जाता है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

सीएम एक्सीलेंस स्कूल भी प्रभावित

राज्य के मुख्यमंत्री एक्सीलेंस स्कूल योजना के तहत संचालित स्कूल भी इस अभियान से अछूते नहीं हैं। ये स्कूल वर्तमान में सीबीएसई पैटर्न पर संचालित हो रहे हैं, जहां नियमित कक्षाएं और समयबद्ध सिलेबस बेहद जरूरी होता है।

- Advertisement -
Ad image

बरियातू गर्ल्स हाई स्कूल के प्राचार्य दीपक सिंह ने बताया कि पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। अब बड़ी संख्या में शिक्षकों के जनगणना में लग जाने से कोर्स समय पर पूरा करना कठिन हो जाएगा, जिसका असर सीधे बोर्ड परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है।

जमीनी स्थिति पहले से चुनौतीपूर्ण

झारखंड में वर्तमान में 80 से अधिक सीएम एक्सीलेंस स्कूल और हजारों सरकारी हाई स्कूल संचालित हैं। कई स्कूलों में पहले से ही विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है। रांची जिले में कई स्कूल ऐसे हैं जहां एक या दो शिक्षक ही कई विषयों की जिम्मेदारी संभालते हैं।ऐसे में जब वही शिक्षक जनगणना कार्य में व्यस्त होंगे, तो कक्षाओं का संचालन और भी प्रभावित होगा।

- Advertisement -
Ad image

किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर

  • बोर्ड कक्षाओं का सिलेबस समय पर पूरा करना
  • कमजोर छात्रों को अतिरिक्त मार्गदर्शन देना
  • प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन
  • बोर्ड परीक्षा परिणाम पर संभावित असर

संभावित समाधान

विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति को संभालने के लिए कुछ विकल्प अपनाए जा सकते हैं, जैसे—

  • गेस्ट या अतिथि शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति
  • ऑनलाइन क्लास और डिजिटल कंटेंट का उपयोग
  • बोर्ड कक्षाओं के लिए विशेष अतिरिक्त कक्षाएं
  • जनगणना ड्यूटी में शिक्षकों की संख्या सीमित करना

आंकड़ों में शिक्षा व्यवस्था

  • झारखंड में सरकारी स्कूल : 35,000 से अधिक
  • हाई स्कूल/प्लस-टू स्कूल : 4,500 से 5,000
  • कुल नामांकित छात्र : 50 लाख से अधिक
  • बोर्ड कक्षाओं के छात्र : 10 से 12 लाख
  • सरकारी शिक्षक : लगभग 2.2 से 2.5 लाख
  • जनगणना कार्य में लगाए गए शिक्षक : लगभग 70–80 प्रतिशत
  • सीएम एक्सीलेंस स्कूल : 80 से अधिक
  • रांची में सीएम एक्सीलेंस स्कूल : 15–20 के बीच

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है।

Share This Article