बोरचल्ला/असम: झारखंड के मुख्यमंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव के प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को उन्होंने बोरचल्ला में झामुमो प्रत्याशी अब्दुल मजान और रोगोनाडी व दुलियाजान में प्रत्याशी पीटर मिंज के पक्ष में विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने असम की भाजपा सरकार और केंद्र की नीतियों पर तीखा प्रहार किया।
डबल इंजन सरकार पर निशाना: ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के मुख्यमंत्री को ‘डबल इंजन सरकार का सबसे चहेता’ बताते हुए कहा कि उनकी पूरी राजनीति ‘फूट डालो और शासन करो’ के सिद्धांत पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि झामुमो का जन्म ही आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ है और पार्टी असम में भी इसी संकल्प के साथ चुनावी मैदान में है।
चाय बागान मजदूरों की स्थिति पर जताई गहरी चिंता
असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले चाय बागान मजदूरों की दयनीय स्थिति पर सोरेन ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:
- न्यूनतम मजदूरी: बागानों में काम करने वाले मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी उनके जीवन-निर्वाह के लिए अपर्याप्त है।
- उपेक्षा का आरोप: वर्षों से इन मजदूरों, किसानों और आदिवासी समुदायों को एक सोची-समझी रणनीति के तहत उपेक्षित रखा गया है।
- झामुमो का संकल्प: हेमंत सोरेन ने वादा किया कि उनकी पार्टी इन श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन और उचित मजदूरी दिलाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेगी।
एनआरसी और सीएए के जरिए विभाजन का आरोप
भाजपा की नीतियों को विभाजनकारी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) के माध्यम से समाज में दरार पैदा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता के बजाय अपने ‘व्यापारी मित्रों’ के हितों को साधने में लगी है और जनता की गाढ़ी कमाई (टैक्स के पैसे) का दुरुपयोग हो रहा है।
चुनावी वादों पर तीखे सवाल
चुनाव के समय महिलाओं के खाते में 9,000 रुपये देने की भाजपा की योजना पर सवाल उठाते हुए सोरेन ने पूछा— “क्या पांच साल के गुजर-बसर के लिए यह राशि काफी है? अगर सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उन्हें हर महीने 9,000 रुपये क्यों नहीं दिए जाते?”
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