केंद्र सरकार ने शनिवार को बीमा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति देने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले से विदेशी कंपनियों के लिए भारत के बीमा बाजार में निवेश करना आसान हो जाएगा और क्षेत्र में पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, बीमा क्षेत्र में आने वाला विदेशी निवेश बीमा अधिनियम, 1938 के नियमों के तहत होगा। साथ ही, जिन कंपनियों में विदेशी निवेश होगा, उन्हें बीमा नियामक संस्था भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) से आवश्यक लाइसेंस और मंजूरी लेनी होगी।
हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के लिए अलग व्यवस्था बरकरार रखी गई है। एलआईसी में विदेशी निवेश की सीमा अधिकतम 20% ही रहेगी, जो ऑटोमैटिक रूट के तहत लागू होगी। इसके लिए एलआईसी अधिनियम, 1956 के प्रावधान लागू होंगे।
नए नियमों में यह भी तय किया गया है कि जिन बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश होगा, उनमें बोर्ड के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय निवासी होना अनिवार्य होगा। इससे कंपनियों में स्थानीय नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इसके अलावा, बीमा क्षेत्र से जुड़े ब्रोकर, रीइंश्योरेंस ब्रोकर, बीमा सलाहकार, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, सर्वेयर और लॉस असेसर जैसे इंटरमीडियरी में भी 100% एफडीआई की अनुमति दी गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने फरवरी में ही इस प्रस्ताव को अधिसूचित कर दिया था। वहीं, दिसंबर 2025 में संसद ने बीमा कानून संशोधन विधेयक पारित कर इस क्षेत्र में बड़े सुधारों का रास्ता साफ किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, नई तकनीक आएगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।










