केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का असर पहले से पढ़ रहे छात्रों पर नहीं पड़ेगा। जो विद्यार्थी वर्तमान में सातवीं, आठवीं या नौवीं कक्षा में हैं, उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान भाषा बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। शिक्षा मंत्री ने बताया कि तीन-भाषा नीति केवल उन विद्यार्थियों पर लागू होगी, जो नए सत्र में कक्षा 6 में प्रवेश लेंगे। यानी मौजूदा छात्रों की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी और उन्हें नई भाषा चुनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो छात्र अभी दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं, वे कक्षा 10 तक उसी व्यवस्था के तहत अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। इस संबंध में CBSE जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा।
नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार देश की 22 भारतीय भाषाओं में स्कूली स्तर के अनुरूप नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करवा रही है। ये किताबें जल्द ही विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएंगी। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि CBSE यह सुनिश्चित करेगा कि स्कूलों में आवश्यक अध्ययन सामग्री के साथ-साथ प्रशिक्षित शिक्षक भी उपलब्ध हों, ताकि नई व्यवस्था को बिना किसी परेशानी के लागू किया जा सके।
नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत कक्षा 6 से 8 तक के प्रत्येक छात्र को वर्षभर में कम से कम 110 घंटे का स्किल मॉड्यूल पूरा करना होगा। इसके लिए स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से स्किल लैब स्थापित की जाएंगी। नई व्यवस्था के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए स्किल डेवलपमेंट से जुड़े विषयों का अध्ययन अनिवार्य होगा। वहीं, कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए यह पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा और वे अपनी रुचि के अनुसार इस कार्यक्रम को चुन सकेंगे।
