रांची, रांची विश्वविद्यालय एक बार फिर गंभीर लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है। स्नातक सेमेस्टर-4 (सत्र 2023-27) के भूगोल विषय की करीब 70 उत्तर पुस्तिकाएं, जिन्हें मूल्यांकन के लिए बिहार भेजा गया था, रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। इस घटना ने छात्रों के भविष्य को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय में इस तरह की घटना सामने आई है। इससे पहले भी मनोविज्ञान और भूगोल विषय की उत्तर पुस्तिकाएं गायब हो चुकी हैं, जिससे परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परीक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कॉपियों को मूल्यांकन के लिए बाहर भेजने की जिम्मेदारी अक्सर संविदाकर्मियों और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को सौंपी जाती है। आरोप है कि इनकी जवाबदेही तय नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। यह भी चर्चा है कि कॉपियों के परिवहन के लिए विश्वविद्यालय के पास अपने वाहन होने के बावजूद बस भाड़ा लिया जाता है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह गहराता है।
प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी चिंता
मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। परीक्षा नियंत्रक प्रभार में हैं और उनका मोबाइल अक्सर बंद रहता है, जबकि रजिस्ट्रार द्वारा फोन नहीं उठाए जाने की भी शिकायतें हैं। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
हालांकि, परीक्षा बोर्ड ने प्रभावित छात्रों को औसत अंक (एवरेज मार्क्स) देने का निर्णय लिया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर अब तक कोई स्पष्टता नहीं है।
नई कुलपति के सामने बड़ी चुनौती
हाल ही में नियुक्त नई कुलपति के सामने विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बार-बार कॉपियों के गायब होने की घटनाओं ने विश्वविद्यालय की साख को भी नुकसान पहुंचाया है। छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं, जिससे छात्रों का भरोसा शिक्षा प्रणाली से उठ सकता है।










