हजारीबाग: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाई-प्रोफाइल सुरक्षा प्राप्त नेता का काफिला कंडम और जर्जर हो चुके वाहनों के भरोसे चल रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठने लगी हैं।
ताजा घटनाक्रम में, हजारीबाग के चौपारण से रांची लौटने के दौरान पदमा थाना क्षेत्र के इटखोरी मोड़ के पास मरांडी के कारकेड में शामिल एक जिप्सी अचानक खराब हो गई। इस वजह से उन्हें भारी बारिश के बीच करीब एक घंटे तक सड़क पर रुकना पड़ा, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर स्थिति असुरक्षित हो गई।

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी घटना सामने आई हो। इससे पहले इसी वर्ष जनवरी महीने में तिलैया में भी उनके काफिले की एक गाड़ी बीच रास्ते में खराब हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है।
बताया जा रहा है कि मरांडी के काफिले में शामिल अधिकांश बुलेटप्रूफ वाहन और अन्य सुरक्षा गाड़ियां 10 से 12 साल पुरानी हो चुकी हैं और 2 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। ऐसे में तकनीकी खराबी होना आम बात बन गई है। मरांडी अक्सर देर रात तक राज्य के संवेदनशील इलाकों का दौरा करते हैं, जिससे इस तरह की खराबी किसी बड़े खतरे को जन्म दे सकती है।
इस मुद्दे को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भी लिखा है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा सुरक्षा के लिए 17 नए बुलेटप्रूफ वाहन खरीदे गए हैं, लेकिन उनमें से केवल 3-4 का ही उपयोग किया जा रहा है, जबकि बाकी वाहन खड़े-खड़े खराब हो रहे हैं।

मरांडी ने सुझाव दिया है कि यदि उन्हें नई गाड़ियां उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं, तो कम से कम इन वाहनों को वरीय अधिकारियों को सौंप दिया जाए ताकि उनका उपयोग होता रहे और वे चालू हालत में बने रहें। यह मामला अब राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है।










