विदेश मंत्रालय (MEA) की साप्ताहिक ब्रीफिंग में भारत सरकार ने अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। सरकार ने विशेष रूप से बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में बड़ा कदम उठाते हुए 2,680 से अधिक संदिग्ध लोगों की सूची वेरिफिकेशन के लिए बांग्लादेश को भेजी है। सत्यापन पूरा होने के बाद इन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह मामला पिछले कई वर्षों से लंबित है और भारत ने बांग्लादेश से जल्द जवाब देने की उम्मीद जताई है ताकि द्विपक्षीय समझौते के तहत प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ सके। प्रवक्ता ने कहा कि जैसे ही इन लोगों की नागरिकता का सत्यापन पूरा हो जाएगा, उन्हें देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कई मामलों में यह वेरिफिकेशन पिछले पांच साल से लंबित है।

चीन सीमा वार्ता और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा
बीजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों पर आयोजित WMCC (Working Mechanism for Consultation and Coordination) की 35वीं बैठक को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया। बैठक में सीमा प्रबंधन, सहयोग और आगामी स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव स्तर की वार्ता की तैयारी पर चर्चा हुई। भारत ने सीमा पार नदियों से जुड़े मुद्दों पर भी विशेषज्ञ स्तर की बैठक की मांग रखी है। मंत्रालय ने इसे रचनात्मक और आगे बढ़ने वाली बातचीत बताया।
अमेरिका में नस्लवाद पर भारत की आपत्ति
अमेरिका में भारतीय नागरिकों के खिलाफ नस्लवाद की घटनाओं पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बातचीत भी जारी है।
यूक्रेन संकट और वैश्विक ऊर्जा मुद्दा
यूक्रेन के विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ हालिया बैठक में वहां की स्थिति पर चर्चा हुई। भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अपनी नीति दोहराई और कहा कि देश अपनी जरूरतों के अनुसार विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति को विविध बना रहा है।
एनर्जी सिक्योरिटी पर भारत का रुख
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहता। नॉर्वे सहित विभिन्न देशों से गैस आपूर्ति को लेकर सहयोग का स्वागत किया जा रहा है।
प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने दोहराया कि अवैध प्रवासियों से निपटने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी होगी। डिपोर्टेशन केवल वेरिफिकेशन और द्विपक्षीय समझौते के तहत ही किया जाएगा।
