जमशेदपुर/पटमदा: झारखंड में बांग्ला भाषा के संरक्षण और सरकारी स्कूलों में बांग्ला शिक्षा की बहाली को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के बैनर तले पूर्वी सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों में जोरदार प्रदर्शन किया गया। समिति के सदस्यों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा।
10 प्रखंडों में एकजुट हुआ बांग्लाभाषी समाज
समिति ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए पूर्वी सिंहभूम के पटमदा, बोराम, जमशेदपुर, पोटका, मुसाबनी, धलभूमगढ़, घाटशिला, चाकुलिया, डुमरिया और बहरागोड़ा प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने कहा कि राज्य की एक बड़ी आबादी की मातृभाषा की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“बांग्ला अकादमी का गठन केवल एक संस्था का निर्माण नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है। मातृभाषा में शिक्षा मिलना हर बच्चे का संवैधानिक अधिकार है।” — समिति सदस्य
विधानसभा में भी उठ चुकी है आवाज
हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने इस मुद्दे को सदन पटल पर रखा था। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया था कि राज्य में लगभग 42 प्रतिशत आबादी बांग्लाभाषी है। इसके बावजूद, भाषा के संरक्षण के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
समिति की मुख्य मांगें:
- बांग्ला अकादमी का गठन: सरकारी स्तर पर अविलंब अकादमी बनाई जाए ताकि पुस्तकों का प्रकाशन और भाषा का प्रचार-प्रसार हो सके।
- शिक्षकों की बहाली: विद्यालयों में रिक्त पड़े बांग्ला शिक्षकों के पदों पर तत्काल प्रभाव से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए।
समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा।
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