भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) दुनिया भर में एक बड़ी चुनौती बन चुका है. आंकड़ों के मुताबिक, इस समय दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग किसी न किसी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, लेकिन जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण एक बड़ी आबादी को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता.
इसी गंभीर अंतर को पाटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नई गाइडलाइन जारी की है. इसके तहत देशों की सरकारों और संगठनों को ‘साइकोलॉजिकल सेल्फ-हेल्प’ (मनोवैज्ञानिक स्व-सहायता) उपायों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि बिना किसी विशेषज्ञ के भी लोग खुद को डिप्रेशन और एंजाइटी से बचा सकें.
क्या है WHO का यह स्पेशल प्रोग्राम?
WHO की इस नई गाइड में ऐसे सेल्फ-हेल्प कार्यक्रमों को तैयार करने और उन्हें स्थानीय स्तर पर लागू करने के बेहद आसान तरीके बताए गए हैं.
- विशेषज्ञ की जरूरत नहीं: इन तकनीकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें प्रशिक्षित गैर-विशेषज्ञों (Non-experts) की मदद से या फिर उनके बिना (यानी खुद से) भी आसानी से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है.
- कम संसाधनों में कारगर: यूएन हेल्थ एजेंसी के अनुसार, यह प्रोग्राम उन जगहों के लिए वरदान है जहां मेंटल हेल्थ केयर सर्विसेज या डॉक्टरों की कमी है.
5 सप्ताह का फॉर्मूला: जानें कौन सी हैं ये 2 नई तकनीकें
WHO की इस गाइड में दो ऐसे खास मेंटल हेल्थ प्रोग्राम्स का जिक्र है, जिनका कई देशों में सफल ट्रायल किया जा चुका है. इसके तहत लोगों को 5 हफ्तों तक हर हफ्ते लगभग 15 मिनट का एक शॉर्ट सपोर्ट प्रोग्राम फॉलो करना होता है:
1. ‘स्टेप बाय स्टेप’ (Step-by-Step) टूल
यह टूल विशेष रूप से उन वयस्कों (Adults) के लिए डिजाइन किया गया है जो डिप्रेशन (अवसाद) के शुरुआती या गंभीर लक्षणों से जूझ रहे हैं. यह बेहद आसान चरणों में मानसिक स्थिति को सुधारने में मदद करता है.
2. प्रैक्टिकल तनाव प्रबंधन (Stress Management)
इसके तहत रोजमर्रा के तनाव को कम करने के लिए कुछ प्रैक्टिकल तरीके और ऑडियो एक्सरसाइज शामिल हैं. इन्हें व्यक्ति अकेले या ऑडियो की मदद लेकर खुद से अभ्यास कर सकता है.
लेबनान और थाईलैंड में दिख चुका है बड़ा असर
यह कोई नया या बिना परखा हुआ फॉर्मूला नहीं है. WHO के मुताबिक, इन तकनीकों का इस्तेमाल पहले से ही लेबनान और थाईलैंड की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.
संकट से प्रभावित या बेहद कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी यह प्रोग्राम बड़ी आबादी तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाने में पूरी तरह सफल रहा है.
क्यों जरूरी है यह गाइडलाइन?
साक्ष्य और रिसर्च बताते हैं कि ये सेल्फ-हेल्प तरीके डिप्रेशन और एंजाइटी के मामलों को बढ़ने से रोकने में विशेष रूप से असरदार साबित हुए हैं. WHO का मुख्य लक्ष्य यही है कि दुनिया के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति को बिना किसी भारी खर्च या पाबंदी के, आसानी से एविडेंस-बेस्ड (प्रमाणित) मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिल सके.
अगर आप या आपके आसपास कोई भी तनाव महसूस कर रहा है, तो WHO के इन आसान सेल्फ-हेल्प टूल्स की मदद लेकर एक स्वस्थ मानसिक जीवन की शुरुआत की जा सकती है.
