फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज विवाद पर चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला, 30 जून तक नाम बहाल नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज विवाद पर चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला, 30 जून तक नाम बहाल नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

Johar News Times
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दुमका: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज का नाम बदले जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि आदिवासी महापुरुषों और वीरांगनाओं के सम्मान से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी इतिहास, संस्कृति और विरासत को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। दुमका दौरे के दौरान मेडिकल कॉलेज पहुंचे चंपाई सोरेन ने कहा कि किसी संस्थान से महापुरुषों का नाम हटाना समाज की भावनाओं को आहत करने जैसा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने नायकों के सम्मान को मिटाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा।

30 जून तक नाम बहाल नहीं हुआ तो होगा आंदोलन
चंपाई सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 जून तक मेडिकल कॉलेज के नाम में फूलो-झानो का नाम दोबारा नहीं जोड़ा गया, तो आदिवासी समाज के हजारों लोग स्वयं पहुंचकर नाम बहाल करने का काम करेंगे। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर समाज में व्यापक नाराजगी और आक्रोश है।

नाम परिवर्तन को लेकर बढ़ा विवाद
दुमका स्थित मेडिकल कॉलेज लंबे समय से शहीद फूलो-झानो मुर्मू मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता रहा है। हाल में इसका नाम बदलकर गवर्नमेंट हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज किए जाने के बाद छात्र संगठनों और स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया है। इसी मुद्दे पर राज्य की राजनीति भी गरमा गई है।

हेमंत सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और गौरव से जुड़े प्रतीकों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार काम कर रही है तथा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संदर्भ में भी आदिवासी समाज को अलग रखने की बात कही गई है। फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज के नाम को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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