पश्चिमी सिंहभूम जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में यूनिसेफ ने अपनी पहल तेज कर दी है। इसी कड़ी में यूनिसेफ दिल्ली और रांची की संयुक्त टीम मंगलवार को दो दिवसीय दौरे पर चाईबासा पहुंची। टीम का मुख्य उद्देश्य जन्म से छह माह से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के खतरे की पहचान करना और उसके प्रभावी प्रबंधन के लिए रणनीति तैयार करना है।
इस विशेष टीम में यूनिसेफ दिल्ली की पोषण प्रमुख मेरी क्लाउड डेसीलेट, सामाजिक एवं व्यवहारिक बदलाव प्रमुख डेनिस क्रिस्टियान, यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख कनिनीका मित्रा, पोषण विशेषज्ञ डॉ. समीम तथा डॉ. प्रतीश कुमार नायक शामिल हैं। दौरे के पहले दिन टीम ने समर कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की और जिले में चल रहे पोषण कार्यक्रमों की समीक्षा की।
यूनिसेफ की टीम ने चाईबासा सदर अस्पताल स्थित कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) का निरीक्षण किया। यहां भर्ती बच्चों के इलाज, पोषण प्रबंधन और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली गई। इसके बाद टीम ने तोडांगबासा और आचू-बी आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा कर वहां संचालित पोषण कार्यक्रमों की प्रगति का जायजा लिया तथा जमीनी स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की।
पोषण विशेषज्ञों ने समर कार्यक्रम के तहत छह माह से 59 माह तक के कुपोषित बच्चों में बेहतर रिकवरी के लिए टीएचआर (टेक होम राशन) की उपयोगिता पर विशेष चर्चा की। टीम ने जिले में टीएचआर को प्रभावी ढंग से लागू करने का सुझाव दिया, ताकि कुपोषित बच्चों को घर पर ही पर्याप्त पोषण मिल सके और उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो।
यूनिसेफ टीम ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। विशेषज्ञों ने बच्चों के शुरुआती 1000 दिनों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने और नियमित निगरानी प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया।
जिला प्रशासन ने यूनिसेफ के सुझावों को जल्द लागू करने का आश्वासन दिया। बैठक में सिविल सर्जन, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि इस पहल से जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई को और मजबूती मिलेगी।
सिविल सर्जन डॉ. जुझारू मांझी ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले से कुपोषण को दूर करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ की टीम के सहयोग से लगातार इस मिशन पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में नीति आधारित योजनाओं के तहत कार्य जारी है और उम्मीद है कि आने वाले समय में पश्चिमी सिंहभूम कुपोषण मुक्त जिला बनने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करेगा।










