डुमरिया प्रखंड के भालुकपतड़ा मौजा में करोड़ों रुपये की लागत से बना 30 बेड का आधुनिक अस्पताल आज भी शुरू होने का इंतजार कर रहा है। विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि बिजली कनेक्शन के अभाव में यह पूरी तरह तैयार अस्पताल मरीजों के इलाज के बजाय ‘शो-पीस’ बनकर खड़ा है।
हाल ही में राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली नहीं होने के कारण टॉर्च की रोशनी में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया था। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार के ठोस संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
फाइलों में अटका काम, भुगतान का इंतजार
अस्पताल शुरू न होने की सबसे बड़ी वजह स्वास्थ्य विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय की कमी बताई जा रही है। बिजली विभाग के सहायक अभियंता अभिषेक कुमार के अनुसार, अस्पताल तक हाईटेंशन लाइन पहुंचाने के लिए प्राक्कलन तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया गया है, लेकिन अब तक आवश्यक राशि जमा नहीं की गई है। भुगतान नहीं होने के कारण न तो सामग्री खरीदी जा सकी है और न ही लाइन विस्तार का काम शुरू हो पाया है।
ट्रांसफार्मर लगा, फिर भी अंधेरे में अस्पताल
विडंबना यह है कि अस्पताल परिसर में ट्रांसफार्मर पहले से स्थापित है। इसके बावजूद बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है, क्योंकि हाईटेंशन लाइन अब तक नहीं जोड़ी गई है। जानकारी के मुताबिक यह लाइन अस्पताल से करीब 200 मीटर की दूरी पर है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी न होने से कनेक्शन लंबित है। नतीजतन, अस्पताल में लगे महंगे उपकरण बेकार पड़े हैं।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब अस्पताल पूरी तरह तैयार है, तो सिर्फ बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में इलाज शुरू न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रामीणों को अब भी इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने क्षेत्र के सांसद विद्युत वरण महतो और विधायक संजीव सरदार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि जल्द से जल्द अस्पताल में बिजली बहाल हो सके और स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो सकें।
सिस्टम पर उठते सवाल
यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब भवन, उपकरण और जरूरत, तीनों मौजूद हैं, तो केवल विभागीय समन्वय की कमी के कारण आम जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित क्यों रहना पड़ रहा है? डुमरिया का यह अस्पताल फिलहाल इसी सवाल का मूक गवाह बना हुआ है कि विकास सिर्फ निर्माण से नहीं, बल्कि समय पर संचालन से साबित होता है।











