झारखंड के सारंडा क्षेत्र को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करने की समयसीमा पूरी होने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तय डेडलाइन के बाद भी यहां नक्सलियों का आत्मसमर्पण नहीं बढ़ पाया है। इस स्थिति की पड़ताल के लिए एक ग्राउंड रिपोर्ट में चार दिनों तक सारंडा क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न पहलुओं को समझने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, नक्सल मुक्ति अभियान में सरेंडर एक अहम कड़ी है, जिस पर झारखंड पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। नक्सली नेता मिसिर बेसरा समेत अन्य के परिजनों को बुलाकर बातचीत की पहल भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। वहीं पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण के विपरीत, सारंडा में यह प्रक्रिया धीमी बनी हुई है।
जांच के दौरान नक्सली सूत्रों, एक्टिविस्टों और अधिकारियों से बातचीत में सरेंडर नहीं होने की तीन प्रमुख वजहें सामने आई हैं:
पहली वजह: सरेंडर के बाद जेल का प्रावधान
अधिकारियों के मुताबिक, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राज्यों में सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जेल नहीं भेजा जाता, जबकि झारखंड में उन्हें जेल या ओपन जेल में रखा जाता है। यह शर्त नक्सलियों को आत्मसमर्पण से रोकने वाली बड़ी बाधा बन रही है।
दूसरी वजह: मामलों का खत्म न होना
पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर दर्ज मामलों को समाप्त कर दिया जाता है और उन्हें रोजगार के अवसर भी दिए जाते हैं। वहीं झारखंड की नीति के तहत पहले जेल भेजा जाता है और बाद में हजारीबाग ओपन जेल में स्थानांतरित किया जाता है, जहां परिवार के साथ रहने की सुविधा होती है, लेकिन मामलों को खत्म करने का प्रावधान नहीं है।
तीसरी वजह: मिसिर बेसरा का खौफ
प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) का झारखंड में नेतृत्व करने वाले मिसिर बेसरा का प्रभाव भी बड़ा कारण बताया गया है। वह एक हार्डकोर माओवादी नेता माना जाता है और सैन्य गतिविधियों में अनुभवी है। सूत्रों के अनुसार, निचले स्तर के कई नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं और कुछ पुलिस के संपर्क में भी हैं, लेकिन बेसरा के डर के कारण वे खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं।रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि जब तक शीर्ष नेतृत्व, खासकर मिसिर बेसरा, सरेंडर के लिए तैयार नहीं होता, तब तक बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण संभव नहीं दिखता।










