कर्नाटक की शृंगेरी सीट पर पोस्टल बैलेट री-काउंटिंग से सियासी घमासान, हाई कोर्ट के आदेश के बाद वोटों की दोबारा गिनती, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

कर्नाटक की शृंगेरी सीट पर पोस्टल बैलेट री-काउंटिंग से सियासी घमासान, हाई कोर्ट के आदेश के बाद वोटों की दोबारा गिनती, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

Johar News Times
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कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। यह री-काउंटिंग Karnataka High Court के निर्देश पर कराई गई, जिसमें पहले खारिज किए गए पोस्टल बैलेट्स की दोबारा जांच और गिनती शामिल थी।

इस प्रक्रिया के बाद वोटों के आंकड़ों में कुछ बदलाव सामने आए हैं, जिससे चुनाव परिणाम को लेकर विवाद गहरा गया है। भाजपा उम्मीदवार D. N. Jeevaraj ने दावा किया है कि पुनर्गणना में उन्हें बढ़त मिली है और अंतर लगभग 50 से अधिक वोटों का हो गया है।

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वहीं कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पोस्टल बैलेट्स की गिनती में पहले भी कई खामियां थीं और अब दोबारा गिनती में भी स्पष्टता की जरूरत है।

क्या है पूरा मामला:
शृंगेरी सीट पर पिछले चुनाव में बेहद करीबी मुकाबला हुआ था, जहां जीत-हार का अंतर काफी कम रहा। इसके बाद पोस्टल बैलेट्स को लेकर विवाद शुरू हुआ और मामला अदालत तक पहुंच गया।

चुनावी पारदर्शिता पर सवाल:
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टल बैलेट्स की गिनती में स्पष्ट दिशा-निर्देश और तकनीकी सुधार जरूरी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद से बचा जा सके।

फिलहाल, शृंगेरी सीट का यह मामला कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बड़े राजनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।

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