आतंकवाद पर होगा ‘बुलेटप्रूफ’ प्रहार: राष्ट्रीय राइफल्स को मिलेंगे 159 आधुनिक सुरक्षा वाहन, जानें क्या है खास

मेक इन इंडिया का दम: राष्ट्रीय राइफल्स को मिलेंगे स्वदेशी बुलेटप्रूफ कवच।

Johar News Times
3 Min Read

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स की ताकत में अब जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है। भारतीय सेना ने आतंकवाद विरोधी अभियानों को और अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाने के लिए 159 आधुनिक बुलेटप्रूफ ट्रूप कैरियर खरीदने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सेना के इस कदम से न केवल जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आतंकियों के खिलाफ घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन में भी तेजी आएगी।

- Advertisement -
Ad image

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

यह पूरी खरीद प्रक्रिया प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत की जा रही है। सेना ने भारतीय कंपनियों की पहचान के लिए RFI जारी किया है। अनुबंध मिलने वाली कंपनी को प्रति वर्ष कम से कम 60 वाहनों की आपूर्ति करनी होगी, जिससे स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

कठिन परिस्थितियों के ‘सुपरहथियार’ होंगे ये वाहन

ये नए वाहन विशेष रूप से घाटी और लद्दाख की भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाएंगे। इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • रफ्तार: ये वाहन सड़कों पर 80 से 100 किमी/घंटा और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर 50 से 75 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगे।
  • रेंज: मैदानी इलाकों में 350 किमी और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इनकी रेंज 300 किमी तक होगी।
  • तापमान और ऊंचाई: ये वाहन 5,000 मीटर की ऊंचाई पर और -10°C से +40°C के भीषण तापमान में भी पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे।

हमले का जवाब देने में भी सक्षम

इन बुलेटप्रूफ कैरियरों का उद्देश्य केवल सैनिकों को सुरक्षित ले जाना ही नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर जवाब देना भी है। आरएफआई के अनुसार, इन वाहनों में:

  1. मशीनगन माउंट: छत पर हैच के जरिए मशीनगन चलाने की सुविधा होगी।
  2. फायरिंग पॉड्स: जवानों के लिए वाहन के भीतर से ही फायरिंग करने के लिए विशेष पॉड्स दिए जाएंगे।
  3. युद्ध सामग्री: हथियार, गोला-बारूद और अत्याधुनिक संचार उपकरणों को ले जाने के लिए पर्याप्त जगह होगी।

वर्तमान में राष्ट्रीय राइफल्स पुराने वाहनों का उपयोग कर रही है। नए बीपीटीसी के शामिल होने से आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान जवानों के हताहत होने की संभावना न्यूनतम हो जाएगी और सेना की स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

- Advertisement -
Ad image
Share This Article