भारत से 250 बीने मनेशे यहूदी इजरायल पहुंचे, ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ के तहत शुरू हुआ पुनर्वास अभियान

Johar News Times
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नई दिल्ली/तेल अवीव: पूर्वोत्तर भारत से करीब 250 यहूदी इजरायल पहुंच गए हैं। यह समूह बीने मनेशे समुदाय से संबंधित है, जिसे इजरायल सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष पुनर्वास अभियान के तहत बुलाया गया है। पिछले साल घोषित योजना के अनुसार, आने वाले पांच वर्षों में हजारों यहूदियों को इजरायल लाने और बसाने के लिए आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। इसी कड़ी में यह पहला जत्था गुरुवार को इजरायल पहुंचा।

बीने मनेशे समुदाय मुख्य रूप से मणिपुर और मिजोरम के कुछ हिस्सों में निवास करता है। समुदाय का दावा है कि उनका वंश बाइबिल में वर्णित मनेशे कबीले से जुड़ा है। 1990 के दशक से इस समुदाय के लोग धीरे-धीरे इजरायल में बस रहे हैं। अब तक लगभग 4,000 सदस्य वहां पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 6,000 लोग अभी भी आव्रजन की प्रतीक्षा में हैं।

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इजरायल सरकार ने 2026 के दौरान “ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन” के तहत करीब 1,200 और लोगों को इजरायल लाने की योजना बनाई है। अलिया और इंटीग्रेशन मंत्रालय के अनुसार, अगले दो हफ्तों में दो और उड़ानें निर्धारित हैं। इस पूरी पुनर्वास योजना के लिए करीब 9 करोड़ शेकेल (लगभग 3 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का बजट तय किया गया है।

बीने मनेशे समुदाय की यहूदी पहचान को लेकर पहले विवाद भी रहा है। वर्ष 2005 में सेफारदी समुदाय के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने उन्हें “इजराइल के वंशज” के रूप में मान्यता दी थी, जिसके बाद उनके इजरायल आने का रास्ता साफ हुआ। समुदाय का मानना है कि वे उन 10 कबीलों में से एक मनेशे कबीले के वंशज हैं, जिन्हें करीब 2,700 वर्ष पहले निर्वासित किया गया था।

इतिहासकारों के अनुसार, यह समुदाय समय के साथ फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन तक प्रवास करता रहा और कई पारंपरिक यहूदी प्रथाओं का पालन करता रहा। हालांकि, बाद में मिशनरियों के प्रभाव से इनके कई सदस्य ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे। इजरायल की नागरिकता प्राप्त करने के लिए अब उन्हें औपचारिक रूप से यहूदी धर्म अपनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

गौरतलब है कि इजरायल की स्थापना दुनियाभर के यहूदियों को एकत्रित करने के उद्देश्य से हुई थी। यही वजह है कि सरकार विभिन्न पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से यहूदी समुदाय को इजरायल में बसने के लिए प्रोत्साहित करती है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एडोल्फ हिटलर के शासन में हुए अत्याचारों के कारण भी बड़ी संख्या में यहूदियों का विभिन्न देशों में पलायन हुआ था।

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