झारखंड के धनबाद जिले के सोनारडीह (कतरास) स्थित टंडाबारी में गुरुवार देर रात एक भयावह घटना सामने आई, जहां प्रकृति और खनन गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव से बड़ा भू-धंसान हो गया। इस हादसे में देखते ही देखते आधी बस्ती जमीन में समा गई और कई घर पूरी तरह जमींदोज हो गए।
जानकारी के अनुसार, अचानक हुए भू-धंसान के कारण पूरा इलाका करीब 20 फीट गहरे गड्ढे में तब्दील हो गया। पूर्व प्रमुख मीनाक्षी रानी गुड़िया का घर सहित दर्जनों पक्के मकान पल भर में मिट्टी में समा गए। आधी रात के सन्नाटे में जमीन फटने और घर ढहने की आवाजों से लोग दहशत में आ गए।
लोग गहरी नींद से जागकर अपने बच्चों को लेकर नंगे पैर घरों से बाहर भागने लगे। इस अफरा-तफरी के दौरान कई लोग गिरकर और मलबे की चपेट में आकर घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार दिया गया। बताया गया कि एक घर के भीतर खड़ी कार भी मलबे के साथ जमीन में समा गई।

अपना सब कुछ खो चुके प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की कमाई से अपने घर बनाए थे, लेकिन अचानक आई इस आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि यह घटना सिस्टम और खनन प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है।
घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। विस्थापित और प्रभावित लोगों ने बीसीसीएल प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और शुक्रवार को सुरक्षा व पुनर्वास की मांग को लेकर एनएच-32 को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीसीसीएल की अनदेखी के कारण दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पहले ही धंसान की चेतावनी दी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला पुलिस और सीआईएसएफ की टीम मौके पर तैनात कर दी गई है। पुलिस लोगों को समझाने और यातायात बहाल कराने का प्रयास कर रही है। हालांकि प्रभावित परिवारों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक सुरक्षित पुनर्वास और उचित मुआवजे का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
फिलहाल पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा और भय का माहौल बना हुआ है।










