जमशेदपुर: बिष्टुपुर में चाय दुकान चलाने वाली युवती मेहंदी पर दबंगों द्वारा खौलती चाय फेंकने की अमानवीय घटना ने अब तूल पकड़ लिया है। भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन (पूर्वी सिंहभूम) ने इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने और अस्पताल प्रबंधन द्वारा इलाज के नाम पर बिल थमाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले दिनों बिष्टुपुर में कुछ मनचले दबंगों ने खौफनाक कृत्य करते हुए युवती मेहंदी पर खौलती हुई चाय फेंक दी थी। इस हमले में युवती गंभीर रूप से झुलस गई, जिसके बाद उसे TMH (टाटा मुख्य अस्पताल) में भर्ती कराया गया। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष श्री एस. एन. पाल ने बताया कि बिहार और झारखंड में सीमित बर्न्स यूनिट होने के कारण पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए TMH ले जाना पड़ा।
कानून का उल्लंघन: बिल थमा रहा अस्पताल प्रबंधन
एसएन पाल ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए TMH प्रबंधन की संवेदनहीनता पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 397 और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357C के तहत ज्वलनशील पदार्थ या एसिड हमले के पीड़ितों का इलाज निःशुल्क करना अनिवार्य है।
- कानूनन सरकारी और निजी, दोनों ही अस्पतालों को ऐसे मामलों में पीड़िता को मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध करानी चाहिए।
इसके बावजूद, TMH प्रबंधन द्वारा पीड़िता के गरीब परिजनों को इलाज का भारी-भरकम बिल थमाया जा रहा है, जो कि सीधे तौर पर कानूनी प्रावधानों की अवहेलना है।
प्रशासन और राजनीतिक दलों पर तीखे सवाल
एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से सीधे तीन सवाल पूछे हैं:
- क्या कोई निजी अस्पताल देश के कानून से ऊपर है?
- क्या खुलेआम कानूनी प्रावधानों की अवहेलना की जा सकती है?
- पीड़िता को मुफ्त इलाज दिलाने के लिए प्रशासन अब तक खामोश क्यों है?
साथ ही, श्री पाल ने उन राजनीतिक नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो अस्पताल जाकर केवल आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन इलाज का खर्च माफ करवाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं कर रहे।
भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:
- तत्काल मुफ्त इलाज: पीड़िता का संपूर्ण इलाज बिना किसी देरी के निःशुल्क किया जाए।
- अस्पताल पर कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने पर TMH प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
- मुआवजा: पीड़िता को सरकारी सहायता और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
- कठोर सजा: दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो जो नजीर बने।
निष्कर्ष: भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़िता को तत्काल न्याय और मुफ्त इलाज नहीं मिला, तो संगठन इस मामले को उच्च स्तर पर ले जाने और न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
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