रांची: उत्पाद सिपाही भर्ती फर्जीवाड़े में 164 आरोपी कोर्ट में पेश, 4 बसों में भरकर लाए गए ‘मुन्नाभाई’, मची अफरा-तफरी

Johar News Times
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रांची: झारखंड में परीक्षा चोरी और संगठित पेपर लीक गिरोह के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सोमवार को उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में गिरफ्तार 164 आरोपियों को एक साथ रांची सिविल कोर्ट में पेश किया गया। इतनी बड़ी संख्या में आरोपियों की मौजूदगी से कोर्ट परिसर छावनी में तब्दील हो गया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: छावनी बना कोर्ट परिसर

164 आरोपियों को एक साथ न्यायालय लाने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी। चार बड़ी बसों और कई पुलिस वाहनों के काफिले के साथ आरोपियों को लाया गया। सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे कोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। आरोपियों के पहुंचने ही उनके परिजनों और वकीलों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे घंटों तक वहां गहमागहमी बनी रही।

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बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी

न्यायालय में सभी आरोपियों का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत एक-एक कर सभी के बयान लिए जा रहे हैं, जिसके बाद उनकी संलिप्तता के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। सूत्रों की मानें तो प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा सकता है।

कठोर धाराओं में फंस सकते हैं आरोपी

कानूनी विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं के अनुसार, यह मामला संगठित अपराध (Organized Crime) की श्रेणी में आता है।

  • संभावित धाराएं: आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 और 112 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
  • सजा का प्रावधान: यदि ये धाराएं प्रभावी होती हैं, तो दोषियों को 10 वर्ष तक की कठोर सजा हो सकती है। ऐसे मामलों में निचली अदालत से जमानत मिलना भी मुश्किल होता है।

परिजनों का पक्ष: “साजिश के तहत फंसाया गया”

एक तरफ जहाँ पुलिस इसे बड़ा सिंडिकेट मान रही है, वहीं दूसरी ओर आरोपियों के परिजनों ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि अभ्यर्थियों को गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका दावा है कि पुलिस को जो प्रश्न पत्र मिले हैं, उनका मुख्य परीक्षा से कोई मिलान नहीं है और बच्चे केवल अपनी तैयारी कर रहे थे।

आगे क्या?

झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन परीक्षा चोरी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगनाओं की तलाश अभी जारी है। न्यायालय के फैसले पर न केवल आरोपियों के भविष्य, बल्कि राज्य की पूरी भर्ती प्रक्रिया की साख टिकी हुई है।

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