राँची/पलामू: झारखंड में हुए ट्रेजरी (कोषागार) घोटाले ने अब एक बड़ा और गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले की आंच अब पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुँच गई है। ताजा खुलासे के बाद डीएसपी (DSP) और एसपी (SP) स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी अब संदेह के घेरे में है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
पलामू ट्रेजरी से भी अवैध निकासी का शक
जांच एजेंसियों को अब पलामू जिले की ट्रेजरी से भी संदिग्ध तरीके से भारी धनराशि निकाले जाने के संकेत मिले हैं। शुरुआती जांच के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि यह घोटाला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सिंडिकेट कई जिलों में सक्रिय हो सकता है। एजेंसियां अब पिछले कई वर्षों के दस्तावेजों और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं।
मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: ‘शुरुआत से हो जांच’
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि घोटाले की तह तक जाने के लिए इसकी शुरुआत (Scrutiny from the base) से जांच की जाए। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा है कि:
“जनता की गाढ़ी कमाई का गबन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घोटाले में जो भी अधिकारी या कर्मचारी शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
अधिकारियों की संलिप्तता पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग के फंड से जुड़ी कुछ ऐसी फाइलें मिली हैं जिन पर वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, लेकिन निकासी के उद्देश्य संदिग्ध पाए गए हैं। जांच एजेंसियां अब उन कड़ियों को जोड़ रही हैं जिनसे यह पता चल सके कि अवैध निकासी का यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा था।
हड़कंप और आगामी खुलासे
पलामू सहित अन्य जिलों की ट्रेजरी में चल रही गहन जांच के बाद प्रशासनिक खेमे में तनाव का माहौल है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों पर गाज गिर सकती है और गबन की गई कुल राशि का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।
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