गुवा (पश्चिमी सिंहभूम): सेल (SAIL) प्रबंधन द्वारा गुवा लौह अयस्क खानों में चल रही बहाली प्रक्रिया में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। लंबे समय से रोजगार की बाट जोह रहे सारंडा के युवाओं के लिए यह पहल एक बड़ी संजीवनी बनकर उभरी है।
स्थानीयता को मिला सम्मान
झारखंड के इस सुदूरवर्ती क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों द्वारा स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग हमेशा से प्रमुख रही है। इस बार सेल प्रबंधन ने आसपास के गांवों के युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में वरीयता दी है। इस कदम को न केवल रोजगार के नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक सकारात्मक और सराहनीय पहल माना जा रहा है।
मानकी-मुंडा ने थपथपाई पीठ
गुवा दौरे पर पहुंचे सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम और जोजोगुटू गांव के मुंडा कानुराम देवगम ने इस निर्णय का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने कहा:
“यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे स्थानीय युवाओं में आत्मविश्वास जागेगा।”
सामूहिक प्रयास की जीत
मानकी और मुंडा प्रतिनिधियों ने इस सफलता का श्रेय किसी एक को न देकर सामूहिक एकजुटता को दिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पक्षों का आभार व्यक्त किया:
- सेल प्रबंधन: स्थानीय हितों को ध्यान में रखने के लिए।
- श्रमिक यूनियन: युवाओं की आवाज को सही मंच पर उठाने के लिए।
- 18 गांवों के मुंडा और ग्रामीण: एकजुट होकर अपनी मांगों पर अडिग रहने के लिए।
विकास की नई उम्मीद
प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी सेल और अन्य औद्योगिक संस्थान इसी प्रकार स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देते रहेंगे। उनका मानना है कि जब स्थानीय युवाओं के हाथ में काम होगा, तभी क्षेत्र से पलायन रुकेगा और पूरे सारंडा अंचल का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।









