गुवाहाटी/रांची: झारखंड के गांडेय से विधायक और जेएमएम की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन को असम चुनाव प्रचार के दौरान बड़ी प्रशासनिक बाधा का सामना करना पड़ा। प्रशासन द्वारा अंतिम समय में हेलीपैड की एनओसी (NOC) न दिए जाने के कारण उनकी तीन महत्वपूर्ण जनसभाएं प्रभावित हुईं। हालांकि, कल्पना सोरेन ने हार नहीं मानी और सड़क मार्ग से यात्रा करते हुए फोन के जरिए ही जनता को संबोधित किया।
हेलीपैड विवाद: तीन सभाओं में नहीं पहुंच सकीं कल्पना

तय कार्यक्रम के अनुसार, कल्पना सोरेन को रविवार को असम के खुमताई, नहरकटिया और मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रैलियों को संबोधित करना था।
- अनुमति से इनकार: प्रशासन द्वारा हेलीपैड की स्वीकृति नहीं दिए जाने के कारण उनका हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सका।
- सोशल मीडिया पर नाराजगी: कल्पना सोरेन ने अपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस घटना की जानकारी साझा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। उन्होंने लिखा कि दुर्भाग्यवश प्रशासनिक बाधाओं के कारण वे प्रत्यक्ष रूप से जनता के बीच नहीं पहुंच सकीं।
सड़क मार्ग से सफर और ‘डिजिटल’ संबोधन
प्रशासनिक अड़चनों के बावजूद कल्पना सोरेन का हौसला कम नहीं हुआ। मार्गेरीटा की सभा के लिए उन्होंने सड़क मार्ग का सहारा लिया। रास्ते में उन्होंने:
- खुमताई और नहरकटिया की जनता को मोबाइल फोन के माध्यम से संबोधित किया।
- फोन पर अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र और असम की सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि “आवाज दबाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।”
- उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस ‘अन्याय’ का जवाब अपने वोट के माध्यम से दें।
असम चुनाव 2026: एक नज़र में
गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। 9 अप्रैल 2026 को राज्य की 126 सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के पक्ष में प्रचार करने पहुंचीं कल्पना सोरेन के कार्यक्रमों में आई इस बाधा ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
निष्कर्ष: विपक्ष का आरोप
जेएमएम और विपक्षी दलों ने इसे सत्ता पक्ष की बौखलाहट करार दिया है। उनका आरोप है कि भाजपा नीत सरकार विपक्ष के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल, इस घटना के बाद कल्पना सोरेन के प्रति सहानुभूति और चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, रांची।










