स्वर्णरेखा नदी में ‘मौत का तांडव’: 4 क्विंटल से अधिक मछलियां मृत, जमशेदपुर में दहशत

Johar News Times
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जमशेदपुर: लौहनगरी की जीवनदायिनी मानी जाने वाली स्वर्णरेखा नदी से एक हृदयविदारक और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भयाड़ी स्थित लाल भट्टा नदी किनारे स्लम बस्ती के पास भारी मात्रा में मछलियां मृत पाई गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?

बुधवार की सुबह जब स्थानीय निवासी अपने रोजमर्रा के कामों के लिए नदी किनारे पहुंचे, तो वहां का नजारा भयावह था। पानी के किनारे बड़ी-बड़ी मछलियों का ढेर लगा हुआ था।

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  • अनुमानित मात्रा: लगभग 4 क्विंटल से अधिक मछलियां किनारे लग चुकी हैं।
  • मछलियों का आकार: ग्रामीणों के अनुसार, मृत मछलियों का वजन 250 ग्राम से लेकर 1.5 किलोग्राम तक है।
  • स्थानीय आशंका: लोगों का मानना है कि पानी के भीतर अभी भी हजारों मछलियां मरी पड़ी हो सकती हैं, जो सरकारी अनुमान से कहीं ज्यादा हैं।

प्रदूषण या जहर? विशेषज्ञों की चिंता

इस घटना के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर पर्यावरण और मानवीय स्वास्थ्य से जुड़े हैं:

  1. केमिकल और ऑक्सीजन की कमी: जानकारों का कहना है कि चांडिल डैम से आने वाला पानी जब खरकई नदी में मिलता है, तो उसमें आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र का दूषित रसायन भी घुल जाता है। इससे पानी में डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) का स्तर गिर जाता है, जिससे जलीय जीवों का दम घुटने लगता है।
  2. जहरीले तत्व: यदि मछलियों की मौत औद्योगिक कचरे या किसी जहरीले रसायन के कारण हुई है, तो यह स्थिति बेहद घातक है।

स्वास्थ्य चेतावनी: जानलेवा हो सकता है सेवन

विशेषज्ञों ने कड़ा निर्देश जारी किया है कि इन मृत मछलियों का सेवन कतई न करें।

“अगर मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है तो खतरा कम है, लेकिन यदि कारण रासायनिक अपशिष्ट है, तो इन मछलियों को खाना जानलेवा साबित हो सकता है।”


बढ़ता खतरा और स्थानीय मांग

वर्तमान में नदी किनारे बदबू और संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

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  • सैंपल की जांच: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तत्काल पानी और मछलियों के सैंपल लेकर जांच करे।
  • बाजार पर निगरानी: नगर निकाय यह सुनिश्चित करे कि कोई भी असामाजिक तत्व इन मृत मछलियों को बाजार में बेचने के लिए न ले जाए।

निष्कर्ष: यह घटना जमशेदपुर के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते औद्योगिक प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह ‘जीवनदायिनी’ नदी ‘विषाक्त’ जलधारा में बदल जाएगी।

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