झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल: 6 अप्रैल से जूनियर डॉक्टरों की महा हड़ताल

Johar News Times
3 Min Read

रांची: झारखंड के स्वास्थ्य महकमे में एक बार फिर बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर राजधानी रांची में हुई जूनियर डॉक्टरों की निर्णायक बैठक में ‘आर-पार की लड़ाई’ का बिगुल फूंक दिया गया है। जूनियर डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तो 6 अप्रैल से राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों में कामकाज ठप कर दिया जाएगा।

- Advertisement -
Ad image

बैठक का मुख्य एजेंडा: IMA का मिला साथ

इस आंदोलन को उस वक्त बड़ी ताकत मिली जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने खुलकर जूनियर डॉक्टरों के समर्थन का ऐलान किया। बैठक में रणनीति तैयार की गई कि जब तक सरकार आधिकारिक आदेश जारी नहीं करती, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से तेज होगा।

आंदोलन की रूपरेखा:

  • प्रतीकात्मक विरोध: मांगें पूरी होने तक हर सोमवार को डॉक्टर ‘ब्लैक बैज’ (काली पट्टी) लगाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
  • अंतिम अल्टीमेटम: सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 6 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
  • अनिश्चितकालीन हड़ताल: यदि समय सीमा के भीतर घोषणा नहीं हुई, तो 6 अप्रैल से ओपीडी (OPD) समेत अन्य सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।

प्रमुख पक्ष और उनकी भूमिका

संगठनभूमिका और समर्थन
IMA झारखंडआंदोलन को नैतिक और संगठनात्मक मजबूती प्रदान करना।
IMA-JDNराज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना।
JDA प्रतिनिधिविभिन्न जिलों से आए डॉक्टरों का नेतृत्व और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन।

क्यों बढ़ा डॉक्टरों का आक्रोश?

जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का मामला लंबे समय से लंबित है। कई दौर की वार्ता के बाद भी अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार की देरी उनके भविष्य और आर्थिक स्थिति के साथ खिलवाड़ है।

“हमारी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। रांची की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। हम मरीजों की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन अपने हक के लिए लड़ना भी जानते हैं।”

मरीजों की राहत के लिए लिया एक बड़ा फैसला

आंदोलन के बीच डॉक्टरों ने जिम्मेदारी का परिचय देते हुए फिलहाल आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) को हड़ताल से मुक्त रखा है, ताकि गंभीर मरीजों की जान पर कोई खतरा न आए।

- Advertisement -
Ad image

निष्कर्ष: अब गेंद पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में है। यदि 6 अप्रैल से पहले स्टाइपेंड संशोधन पर कोई आधिकारिक मोहर नहीं लगती, तो पूरे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है।

TAGGED:
Share This Article