आदित्यपुर (सरायकेला-खरसावां): आज 22 मार्च है, पूरी दुनिया ‘विश्व जल दिवस’ मना रही है। लेकिन झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर की जमीनी हकीकत इस उत्सव से कोसों दूर है। GTA न्यूज़ लाइव की विशेष पड़ताल में यहाँ के निवासियों ने जल संकट की जो दास्ताँ सुनाई, वह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
1. नल लगे, पाइप बिछे, पर पानी नदारद
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि प्रशासन ने 4 साल पहले घर-घर पाइपलाइन बिछा दी थी और गड्ढे खोदकर कनेक्शन भी दे दिए थे। लेकिन आज तक उन नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी।
“4 साल हो गए पाइप दिए हुए, पर पानी आज तक नहीं मिला। हम बाहर के बोरिंग से ढो-ढोकर पानी लाते हैं।” — स्थानीय महिला
2. पीने के पानी के लिए ‘बाजार’ पर निर्भरता
आदित्यपुर की बस्तियों में स्थिति इतनी विकट है कि गरीब परिवारों को भी पीने के पानी के लिए ₹30 प्रति जार खर्च करने पड़ रहे हैं।
- आर्थिक बोझ: एक औसत परिवार को महीने में ₹900 केवल पीने के पानी पर खर्च करने पड़ रहे हैं।
- अतिथि सत्कार में मुश्किल: स्थानीय लोगों ने बताया कि घर में मेहमान आ जाएं तो उन्हें पानी पिलाना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
3. नदी-नालों में नहाने की मजबूरी
बोरिंग का पानी केवल घर के कामकाज (बर्तन, कपड़े) के लिए किसी तरह पर्याप्त हो पाता है। लेकिन नहाने के लिए आज भी कई लोग नदी और नालों का रुख करने को मजबूर हैं। बुजुर्गों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव में पानी ढोना उनके लिए शारीरिक रूप से कष्टदायक है, फिर भी कोई विकल्प नहीं है।
4. बुनियादी सुविधाओं का अभाव
पानी के साथ-साथ जल निकासी (ड्रेनेज) की समस्या भी यहाँ विकराल है।
- नाली की समस्या: नालियां सही तरीके से नहीं बनी हैं, जिससे बारिश का पानी और सीवेज का कचरा लोगों के घरों के भीतर घुस जाता है।
- अधूरे प्रोजेक्ट: वर्षों से पानी की टंकी बनाई जा रही है, लेकिन वह कब पूरी होगी और कब सप्लाई शुरू होगी, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है।
निष्कर्ष: दावों और हकीकत के बीच की खाई
आदित्यपुर की इस रिपोर्ट से साफ है कि ‘जल जीवन मिशन’ जैसे बड़े दावे यहाँ की गलियों में दम तोड़ रहे हैं। लोग आज भी टैंकरों, दूर स्थित बोरिंग और महंगे जार के भरोसे अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
GTA न्यूज़ लाइव के लिए आदित्यपुर से श्रेया की रिपोर्ट।











