झारखंड में विकास योजनाओं की रफ्तार पर प्रशासनिक कमियों के कारण ब्रेक लगने की आशंका गहरा गई है। राज्य में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान और आगामी जनगणना कार्यों में प्रखंड विकास पदाधिकारियों की बड़े पैमाने पर तैनाती को लेकर ग्रामीण विकास विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग ने गंभीरता दिखाते हुए राज्य के सभी उप विकास आयुक्तों से 24 घंटे के भीतर स्टेटस रिपोर्ट तलब की है कि उनके जिलों में कितने बीडीओ को इन गैर-विकास कार्यों में लगाया गया है।
इससे पहले भी विभाग ने यह डेटा मांगा था, लेकिन कई जिलों की सुस्ती के कारण दोबारा कड़ा निर्देश जारी करना पड़ा है।
आंकड़ों का खेल: 260 प्रखंड और सिर्फ 193 नियमित बीडीओ
राज्य में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक ढांचे की स्थिति चिंताजनक है:
- कुल प्रखंड: 260
- नियमित बीडीओ: मात्र 193 प्रखंडों में ही स्थायी बीडीओ तैनात हैं।
- अतिरिक्त प्रभार का भरोसा: बाकी के 67 प्रखंड अतिरिक्त प्रभार या प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं।
ऐसे में पहले से ही अधिकारियों की कमी झेल रहे राज्य में, यदि मौजूदा बीडीओ को मतदाता पुनरीक्षण और जनगणना जैसी बड़ी जिम्मेदारियों में झोंक दिया गया, तो ग्रामीण विकास पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
इन महत्वपूर्ण योजनाओं पर पड़ेगा सीधा असर
प्रखंड स्तर पर बीडीओ ही विकास योजनाओं की रीढ़ होते हैं। अधिकारियों की व्यस्तता के कारण निम्नलिखित फ्लैगशिप योजनाओं की स्वीकृति, जियो-टैगिंग, निरीक्षण और भुगतान की रफ्तार धीमी पड़ सकती है:
- मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना
- राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना
- पंचायत स्तर के विकास कार्य और स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियां
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन और विभिन्न विभागों में समन्वय
बैकअप प्लान की तैयारी में जुटा ग्रामीण विकास विभाग
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस रिपोर्ट के जरिए वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करना चाहती है। रिपोर्ट आने के बाद एक ‘वैकल्पिक प्रशासनिक रणनीति’ तैयार की जाएगी, ताकि चुनाव और जनगणना का काम भी न रुके और गांवों में चल रही विकास योजनाएं भी प्रभावित न हों।
