राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। एनसीईआरटी ने कक्षा-9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में देश के ‘चुनाव आयोग’ और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ से जुड़ा एक नया अध्याय शामिल किया है।
इस नए चैप्टर के जरिए अब छात्र भारत की चुनावी व्यवस्था, वोटर लिस्ट तैयार होने के वैज्ञानिक तरीकों और लोकतांत्रिक प्रणाली को बेहद करीब से समझ सकेंगे। खास बात यह है कि इस नई पुस्तक में भारत की पूरी चुनावी प्रक्रिया को ‘बेमिसाल’ शब्द से परिभाषित किया गया है।
पहली बार सिलेबस में आया ‘SIR’
यह पहली बार है जब देश के स्कूली छात्र ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ जैसी जटिल और महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में पढ़ेंगे। इस अध्याय में विस्तार से समझाया गया है कि कैसे SIR के जरिए:
- 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं।
- मृतकों, स्थान बदल चुके लोगों या फर्जी नामों को वोटर लिस्ट से हटाया जाता है।
- अंतिम वोटर लिस्ट जारी करने से पहले जनता से दावे और आपत्तियां मांगकर त्रुटियों को पूरी तरह दूर किया जाता है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोट देने से वंचित न रहे।
EVM, VVPAT और गठबंधन राजनीति का भी मिलेगा पाठ
किताब में केवल थ्योरी नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता को बढ़ाने वाले आधुनिक टूल्स जैसे— इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, वीवीपैट और आदर्श आचार संहिता की भूमिका को भी गहराई से समझाया गया है।
इसके साथ ही छात्रों की तार्किक क्षमता बढ़ाने के लिए एक दिलचस्प प्रैक्टिकल एक्टिविटी जोड़ी गई है। इसमें छात्रों को साल 1977, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद देश में बनी गठबंधन सरकारों और उनके राजनीतिक इतिहास का अध्ययन करने का टास्क दिया गया है।
टाइमिंग को लेकर सियासी और शैक्षणिक गलियारों में चर्चा तेज
एनसीईआरटी का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब देश की राजनीति में विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर लगातार तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच, स्कूली पाठ्यक्रम में इन विषयों को मजबूती से शामिल करने को लेकर अब राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों ही स्तरों पर नई बहस छिड़ गई है।
