झारखंड सरकार ने राज्य की कार्यरत और सेवानिवृत्त महिला प्रसार पदाधिकारियों को वित्तीय लाभ देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इन्हें एसीपी और एमएसीपी का लाभ देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में रांची सहित राज्य के 20 जिलों के उप विकास आयुक्तों को पत्र भेजकर जरूरी सेवा अभिलेख और दस्तावेज जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
पहले भी मांगा गया था प्रतिवेदन, अब विभाग सख्त
विभागीय जानकारी के अनुसार, महिला प्रसार पदाधिकारी लंबे समय से अपने सेवा उन्नयन और वित्तीय लाभ की मांग कर रही थीं।
- इससे पहले ग्रामीण विकास विभाग ने 29 अप्रैल 2026 को भी सभी जिलों से इस संबंध में प्रतिवेदन मांगा था।
- कई जिलों द्वारा समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ था।
- अब विभाग ने दोबारा कड़ा पत्र जारी कर लंबित सूचनाएं और सेवा पुस्तिकाएं तुरंत भेजने को कहा है।
क्या-क्या दस्तावेज मांगे गए हैं?
विभाग की ओर से जारी नए पत्र में महिला प्रसार पदाधिकारियों की सेवा पुस्तिका , सेवा सत्यापन रिपोर्ट और अन्य आवश्यक अभिलेख शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
महिला प्रसार पदाधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और महिला सशक्तीकरण की रीढ़ मानी जाती हैं। वे मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:
- ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
- स्वयं सहायता समूहों का गठन और उनका सुचारू संचालन।
- स्वरोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना।
- विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार और उनकी मॉनिटरिंग करना।
आगे क्या होगा?
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही सभी 20 जिलों से सेवा अभिलेख और सत्यापन रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हो जाएगी, एसीपी-एमएसीपी लाभ से संबंधित प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरे होते ही राज्यभर की महिला प्रसार पदाधिकारियों को बड़ा आर्थिक और सेवा संबंधी लाभ मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
