लौहनगरी जमशेदपुर से ईमानदारी और इंसानियत की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। साकची सब्जी मंडी में खरीदारी के दौरान एक महिला डॉक्टर का करीब ढाई लाख रुपये का सोने का आभूषण गिर गया था। लेकिन मंडी के एक छोटे से सब्जी विक्रेता की ईमानदारी की बदौलत वह कीमती गहना उन्हें सुरक्षित वापस मिल गया।
गहना वापस पाकर जहां डॉक्टर के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान लौट आई, वहीं पूरे इलाके में सब्जी विक्रेता के इस कदम की खूब सराहना हो रही है।
पर्स से पैसे निकालने के दौरान गिरा था कीमती गहना
मिली जानकारी के अनुसार, मानगो की रहने वाली डॉ. आरती ने हाल ही में एक ज्वेलरी शोरूम से सोने का कीमती आभूषण खरीदा था। मंगलवार को वह साकची बसंत टॉकीज के पास स्थित सब्जी मंडी में खरीदारी करने पहुंची थीं।
इसी दौरान जब वह सब्जी वाले को पैसे देने के लिए अपने पर्स से पैसे निकाल रही थीं, तो उनका गहना वहीं कहीं गिर गया। घर लौटने पर जब उन्हें इसका अहसास हुआ, तो उन्होंने मंडी आकर काफी खोजबीन की और लोगों से पूछताछ की, लेकिन गहने का कोई सुराग नहीं मिला।
थाने में दर्ज कराई थी शिकायत, छूट चुकी थी उम्मीद
गहना नहीं मिलने पर हताश होकर डॉ. आरती ने साकची थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, आज के दौर को देखते हुए उन्हें मन ही मन यह उम्मीद कम ही थी कि भीड़भाड़ वाली सब्जी मंडी से उनका ढाई लाख का सोना कभी वापस मिल पाएगा।
सब्जी विक्रेता अहमद बने ‘फरिश्ते’, पुलिस के सामने सौंपा गहना
लेकिन कहते हैं न कि दुनिया में आज भी अच्छे लोगों की कमी नहीं है। बुधवार को मंडी में दुकान लगाने वाले सब्जी विक्रेता अहमद को अपनी दुकान के पास ही वह सोने का गहना चमचमाता हुआ मिला।
अहमद ने बिना किसी लालच के, पूरी ईमानदारी दिखाते हुए तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद साकची थाना प्रभारी गोपाल कृष्ण यादव की मौजूदगी में पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत वह आभूषण डॉ. आरती को सौंप दिया गया।
“आज के दौर में ऐसी ईमानदारी दुर्लभ” अपना खोया हुआ गहना वापस पाकर डॉ. आरती भावुक हो गईं। उन्होंने अहमद का सहृदय आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में जब लोग चंद रुपयों के लिए नीयत बदल लेते हैं, अहमद जैसे इंसान समाज में सचमुच मिसाल हैं।
मंडी के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने की अहमद की तारीफ
सब्जी विक्रेता अहमद के इस सराहनीय और नेक कदम की साकची मंडी के अन्य दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने जमकर प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि अहमद ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी किसी अमीरी की मोहताज नहीं होती, यह इंसान के संस्कारों में होती है।
