भोजपुर एनकाउंटर केस में बड़ा मोड़: SDPO और SHO समेत पुलिसकर्मियों पर हत्या की FIR दर्ज, मां का आरोप- ‘सरेंडर के बाद मारी 5 गोलियां’

कानून के रक्षक ही बने आरोपी! भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में खाकी पर दाग।

Johar News Times
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बिहार के भोजपुर जिले का बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब पुलिस महकमे के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। घटना के सात दिन बाद इस मामले में एक बहुत बड़ा मोड़ आया है। मृतक की मां आशा देवी के लिखित आवेदन पर जगदीशपुर के SDPO राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार समेत पूरी एनकाउंटर टीम के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

फेसबुक लाइव, सरेंडर और फिर 5 गोलियां: मां ने बयां की खौफनाक कहानी

मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने भोजपुर पुलिस अधीक्षक को सौंपे अपने आवेदन में पुलिस थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दिया है। आवेदन के अनुसार:

  • 17 जून की सुबह पुलिस टीम उनके घर पहुंची और भरत तिवारी को जवनियां गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याएं दिखाने और समझने के नाम पर अपने साथ ले गई।
  • परिजनों का दावा है कि वहां पहुंचकर भरत ने बाकायदा फेसबुक लाइव किया और ग्रामीणों की समस्याएं उठाईं। इसके बाद उसने अपनी सुरक्षा में रखा हथियार जमीन पर रख दिया और पुलिस के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया।
  • आरोप है कि सरेंडर करने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे चारों तरफ से घेरा और बेहद करीब से 5 गोलियां दाग दीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

बुजुर्ग पिता को थाने में बंधक बनाने का भी आरोप

“एक तरफ पुलिस मेरे बेटे को गोलियों से भून रही थी, तो दूसरी तरफ घटना के बाद भरत के बुजुर्ग पिता काशीनाथ तिवारी को पूरे दिन शाहपुर थाने में बैठाकर रखा गया। शाम को जब सब कुछ खत्म हो गया, तब परिवार को भरत की मौत की सूचना दी गई।” — परिजनों का आरोप

बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने उठाए तीखे सवाल

इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। बक्सर के नवनिर्वाचित सांसद सुधाकर सिंह ने इस एनकाउंटर और पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे सवाल दागे हैं।

  • STF का ऑपरेशन तो स्थानीय पुलिस क्यों घेरे में? सांसद का कहना है कि यह पूरा ऑपरेशन भोजपुर जिला पुलिस का नहीं, बल्कि एसटीएफ का था।
  • सरेंडर के बाद गोली क्यों? उन्होंने सवाल उठाया कि जब भरत तिवारी ने अपने हथियार जमीन पर डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर उस पर गोली चलाने की क्या मजबूरी थी? क्या पुलिस का मकसद सिर्फ हत्या करना था?

अब जांच पर टिकी सबकी नजरें

भोजपुर पुलिस के आला अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद अब गेंद कानून के पाले में है। क्षेत्र में तनाव और भारी आक्रोश को देखते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी पुलिसकर्मियों पर होने वाली अगली कार्रवाई पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हुई हैं।

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