उज्जैन में कुछ देर के लिए गायब हुई परछाई, शून्य छाया दिवस का बना साक्षी यंत्र महल

ह यंत्र 21 जून के सबसे बड़े दिन, 22 दिसंबर के सबसे छोटे दिन तथा 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन-रात की समान अवधि को दर्शाता है।

Johar News Times
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धार्मिक नगरी उज्जैन ने रविवार को एक दुर्लभ खगोलीय घटना का अनुभव किया। दोपहर 12:28 बजे सूर्य लगभग सिर के ठीक ऊपर पहुंच गया, जिसके कारण कुछ समय के लिए पेड़ों, खंभों और अन्य वस्तुओं की परछाई लगभग गायब हो गई। इस घटना को वैज्ञानिक भाषा में शून्य छाया दिवस’ (Zero Shadow Day) कहा जाता है।

उज्जैन स्थित ऐतिहासिक वेधशाला ‘यंत्र महल’ में इस खगोलीय घटना का विशेष अवलोकन किया गया। चिंतामन रोड पर शिप्रा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित यह वेधशाला प्राचीन काल से खगोल विज्ञान और ज्योतिषीय गणनाओं का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। एक समय उज्जैन को खगोलीय अध्ययन का वैश्विक केंद्र माना जाता था।

साल का सबसे बड़ा दिन

21 जून को सूर्य अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति में पहुंचता है, जिसे ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) कहा जाता है। इसके कारण उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। उज्जैन में रविवार को सूर्योदय सुबह 5:42 बजे और सूर्यास्त शाम 7:16 बजे निर्धारित रहा। इस प्रकार दिन की अवधि 13 घंटे 34 मिनट और रात की अवधि 10 घंटे 26 मिनट रही।

शंकु यंत्र से किया गया अवलोकन

जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त के अनुसार, साफ आसमान और तेज धूप के कारण शंकु यंत्र के माध्यम से इस दुर्लभ खगोलीय घटना का सफलतापूर्वक अवलोकन किया गया। यह वेधशाला जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वारा वर्ष 1733 में स्थापित कराई गई थी और आज भी खगोलीय अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र है।

शंकु यंत्र की विशेषता

यंत्र महल में स्थापित शंकु यंत्र क्षितिज वृत्त के तल पर निर्मित है। इसकी छाया के आधार पर खींची गई रेखाएं 12 राशियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह यंत्र 21 जून के सबसे बड़े दिन, 22 दिसंबर के सबसे छोटे दिन तथा 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन-रात की समान अवधि को दर्शाता है। दिन की अवधि में होने वाले बदलाव के साथ इसकी छाया भी घटती-बढ़ती रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कर्क रेखा के निकट स्थित होने के कारण उज्जैन ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटनाओं के अवलोकन और अध्ययन के लिए देश के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।

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