प्लास्टिक की छत से एशिया कप के स्वर्ण तक: खूंटी के आशीष और प्रेमचंद बने भारतीय हॉकी के नए हीरो

प्लास्टिक की छत से एशिया कप के स्वर्ण तक: खूंटी के आशीष और प्रेमचंद बने भारतीय हॉकी के नए हीरो

Johar News Times
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जमशेदपुर की नवल टाटा हॉकी अकादमी के खिलाड़ियों ने अंडर-18 एशिया कप में भारत को दिलाया गोल्ड, आशीष बने टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर,

झारखंड के खूंटी जिले के दो युवा खिलाड़ी आशीष तानी पूर्ति और प्रेमचंद सोरेन ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के दम पर भारतीय हॉकी में नई पहचान बनाई है। वर्तमान में जमशेदपुर स्थित नवल टाटा हॉकी अकादमी (एनटीएचए) में प्रशिक्षण ले रहे इन दोनों खिलाड़ियों ने जापान में आयोजित अंडर-18 पुरुष एशिया कप में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान आशीष तानी पूर्ति ने 13 गोल दागकर टूर्नामेंट के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी का गौरव हासिल किया।

प्लास्टिक की छत के नीचे पले सपने, अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमके आशीष

खूंटी के मुरहू प्रखंड के गनालोया गांव में एक साधारण कच्चे घर में पले-बढ़े आशीष तानी पूर्ति का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। मजदूर माता-पिता के इकलौते बेटे आशीष को हॉकी की प्रेरणा अपने मामा और नाना से मिली। वर्ष 2022 में रीजनल डेवलपमेंट सेंटर और फिर 2023 में नवल टाटा हॉकी अकादमी से जुड़ने के बाद उनके खेल में बड़ा बदलाव आया।

जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में आशीष का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में अकेले चार गोल किए, जबकि फाइनल में मेजबान जापान के खिलाफ हैट्रिक लगाकर भारत को 4-1 की जीत दिलाई। चीनी ताइपेई के खिलाफ भी उन्होंने तीन गोल दागे। पूरे टूर्नामेंट में 13 गोल के साथ वह टॉप स्कोरर बने। उनकी इस उपलब्धि पर हॉकी इंडिया ने उन्हें तीन लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया है।

फुटबॉल से हॉकी तक, प्रेमचंद ने बदली अपनी तकदीर

प्रेमचंद सोरेन का बचपन भी अभावों में गुजरा। दिहाड़ी मजदूर परिवार से आने वाले प्रेमचंद का पहला प्यार फुटबॉल था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान गांव लौटने के बाद उनका रुझान हॉकी की ओर हुआ। इसके बाद नवल टाटा हॉकी अकादमी ने उनकी प्रतिभा को निखारने का काम किया।

मिडफील्डर के रूप में प्रेमचंद अंडर-18 एशिया कप में भारतीय टीम की रीढ़ साबित हुए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में टीम के खेल को संतुलित रखा और एक महत्वपूर्ण गोल भी किया। लीग चरण में जापान से मिली हार के बाद भारत ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 5-3 से हराया और फिर फाइनल में जापान को पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

एनटीएचए ने दी सपनों को उड़ान

आशीष और प्रेमचंद दोनों का मानना है कि टाटा ट्रस्ट और नवल टाटा हॉकी अकादमी का सहयोग नहीं मिलता तो उनके सपने शायद गांव की पगडंडियों तक ही सीमित रह जाते। विश्वस्तरीय सुविधाओं, आधुनिक प्रशिक्षण और अनुभवी कोचों के मार्गदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। आज खूंटी की लाल मिट्टी से निकले ये दोनों खिलाड़ी न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा का रास्ता नहीं रोक सकतीं, यदि संकल्प मजबूत हो और सही अवसर मिले।

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