झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है।
सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं, तो वहीं एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने एंट्री मारकर पूरे चुनावी गणित को फंसा दिया है।
होटल रेडिसन ब्लू में NDA विधायकों का ‘मॉक पोल’ और ट्रेनिंग
चुनावी सेंधमारी और क्रॉस वोटिंग के खतरे को देखते हुए एनडीए ने अपने कुनबे को एकजुट करने के लिए ‘होटल पॉलिटिक्स’ का सहारा लिया है। भाजपा और सहयोगी दलों के विधायकों को रांची के पॉश होटल रेडिसन ब्लू में ठहराया गया है, जहां 30 से अधिक कमरे बुक हैं। यहाँ विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव की जटिल मतदान प्रक्रिया और वरीयता क्रम को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मतदान के दिन सभी विधायक होटल से सीधे एक साथ विधानसभा पहुंचेंगे।
सीएम हेमंत सोरेन के आवास पर ‘इंडिया’ गठबंधन की नाकेबंदी
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन भी कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। आज (16 जून) और कल (17 जून) मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आधिकारिक आवास पर गठबंधन के सभी विधायकों और शीर्ष नेताओं की महाबैठक बुलाई गई है। यहाँ विधायकों के लिए ‘मॉक पोल’ का आयोजन किया जा रहा है ताकि वोटिंग के दिन कोई तकनीकी गलती या वोट रिजेक्ट होने की गुंजाइश न रहे। मतदान के दिन सभी विधायक पहले सीएम आवास पर जुटेंगे और फिर एक साथ बस से विधानसभा के लिए रवाना होंगे।
“कांग्रेस जहाँ परिमल नाथवानी की एंट्री को संभावित ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ से जोड़कर देख रही है, वहीं भाजपा इस मुद्दे पर सधी हुई चुप्पी साधे हुए है।”
जीत के लिए चाहिए 28 वोट, इन 4 वोटों पर टिकी है सबकी नजरें
झारखंड विधानसभा के मौजूदा समीकरण के अनुसार, राज्यसभा की एक सीट सुरक्षित करने के लिए लगभग 28 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है।
- इंडिया गठबंधन: संख्या बल के हिसाब से दोनों सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में है।
- भाजपा : भाजपा के पास अपने 24 विधायक हैं।
ऐसे में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को जीत के लिए 4 अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा। यही 4 वोट इस समय झारखंड की राजनीति की सबसे बड़ी पहेली बने हुए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि नाथवानी निर्दलीय और असंतुष्ट विधायकों में सेंधमारी कर सकते हैं।
‘अंतरात्मा की आवाज’ और झामुमो का दावा
सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि परिमल नाथवानी पूरी रणनीति और पुख्ता आंकड़ों के साथ मैदान में डटे हैं। उनका “अंतरात्मा की आवाज पर वोट” देने की अपील करना और “सोरेन परिवार से पुराने संबंधों” का हवाला देना, एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि, झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने साफ कहा है, “इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है, हमारा एक भी वोट नहीं टूटेगा। परिमल नाथवानी का मुख्यमंत्री से मिलना सामान्य शिष्टाचार है। दोनों सीटें हमारी झोली में ही आएंगी।”
