झारखंड की ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ घर-चूल्हा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा उपजाए गए उत्पाद अब सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में धूम मचा रहे हैं। पूर्वी सिंहभूम जिले की महिलाओं ने मनरेगा और जेएसएलपीएस के सहयोग से आम बागवानी में सफलता की एक ऐसी नई इबारत लिखी है, जिसकी गूंज सीधे लंदन तक पहुंच गई है।
पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए इन ग्रामीण दीदियों की सफलता की कहानी साझा की, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में है।
लंदन पहुंचे डुमरिया की दीदियों के आम
डुमरिया प्रखंड की अस्तकोवाली पंचायत से ताल्लुक रखने वाली जेएसएलपीएस की दीदियां— लक्ष्मी प्रिय साव, सोहागी मुंडा और ममता साव आज आजीविका सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। मनरेगा की आम बागवानी योजना के तहत इन महिलाओं ने इस वर्ष दो एकड़ भूमि में आम की खेती की और करीब दो क्विंटल आम का उत्पादन किया। सबसे गर्व की बात यह रही कि पूर्वी सिंहभूम से इस साल जो आम लंदन एक्सपोर्ट किए गए, उनमें इन दीदियों के बागान के आम भी शामिल थे।
घाटशिला की मुगली बास्के ने पेश की मिसाल
वहीं, घाटशिला प्रखंड की हेंदलजुरी पंचायत के कालाझोर गांव की प्रगतिशील किसान और सखी दीदी मुगली बास्के का जादू भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिर चढ़कर बोला। जिला प्रशासन द्वारा मुगली को मनरेगा के तहत नि:शुल्क पौधे और तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया था।
अपनी मेहनत की बदौलत मुगली ने इस साल दो एकड़ में रिकॉर्ड 7.5 क्विंटल आम का उत्पादन किया। इसमें से 4 क्विंटल आम को उन्होंने 35 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर करीब 14,000 से 20,000 रुपये की कमाई कर ली है, जबकि बाकी बचा 3.5 क्विंटल आम अभी बिक्री के लिए तैयार है।
आर्थिक रूप से मजबूत हुईं ग्रामीण महिलाएं
अस्तकोवाली पंचायत की महिलाओं ने भी अब तक 1.8 क्विंटल आम बेचकर ₹6,300 से ₹9,000 तक की आय अर्जित की है। आत्मनिर्भर बनीं इन सभी महिलाओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार का आभार जताया है। उनका कहना है कि इस योजना ने उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।
जिला प्रशासन ने इसे ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वावलंबन की दिशा में एक बेहद प्रेरणादायक और ऐतिहासिक कदम बताया है।
